टीआरपी। Tribal culture mesmerizes German tourists : छत्तीसगढ़ के पर्यटन केंद्र और ग्रामीण संस्कृति ने विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी खास जगह बनाई है। पिछले दिनों इसकी झलक तब देखने को मिली जब जर्मनी से आए पर्यटक बर्नहार्ड और फ्रांजिस्का ने जशपुर क्षेत्र के पर्यटक स्थलों का भ्रमण किया और जनजातीय संस्कृति, कला और आत्मीयता से प्रभावित हुए।

विदेशी पर्यटकों ने क्षेत्रीय स्टार्टअप “ट्रिप्पी हिल्स” के अनुभवात्मक पर्यटन कार्यक्रम के तहत जनजातीय जीवन की बारीकियों को समझा। यात्रा की शुरुआत मलार समुदाय से हुई, जो अपने उत्कृष्ट हस्तनिर्मित आभूषणों और शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है। इन कारीगरों की रचनात्मकता ने विदेशी मेहमानों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

विदेशी पर्यटक ने हाट बाजार की संस्कृति भी देखी

विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा के गांव में उन्होंने पारंपरिक जीवनशैली और प्रकृति के साथ गहरे संबंध को महसूस किया। वहीं अगरिया समुदाय के दौरे में लौह गलाने की पारंपरिक तकनीक का जीवंत प्रदर्शन हुआ, जिसने दोनों अतिथियों को आश्चर्यचकित कर दिया। यात्रा का समापन स्थानीय हाट-बाजार में हुआ, जहाँ रंगीन वस्त्र, मिट्टी की खुशबू और पारंपरिक जनजातीय संगीत ने जशपुर की जीवंत सांस्कृतिक धड़कन को अभिव्यक्त किया।

जनजातीय संस्कृति वैश्विक आकर्षण का केंद्र

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में जनजातीय संस्कृति की धरोहर और पर्यटन विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है।  इसी े तहत जशपुर में सड़क, संचार और सुविधाओं के प्रसार से नए पर्यटन मार्ग तैयार हो रहे हैं। “कल्चर देवी” और “अनएक्सप्लॉरड बस्तर” जैसे संगठनों के सहयोग से स्थानीय समुदायों को भी अपने हुनर को दुनिया के सामने लाने का अवसर मिला है। छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति अब वैश्विक आकर्षण का केंद्र बन रही है, जहां परंपरा, प्रकृति और आधुनिकता का सुंदर संगम नजर आता है।
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रिपोर्टर श्रवण शर्मा 28 वर्षों से पत्रकारिता जगत में कार्यरत हैं। पूर्व में लगभग 7 वर्षो तक दिल्ली के प्रतिष्ठित अखबारों में पत्रकार के रूप में कार्य किया। इसके पश्चात विगत 21 वर्षों से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कार्यरत हैं। दैनिक जागरण ग्रुप के नईदुनिया संस्थान में 17 वर्ष तक कार्य किया। वर्तमान में टीआरपी न्यूज में गत वर्ष से कार्य कर रहे हैं।
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