रायपुर। रेल विभाग में 30 अक्टूबर से 05 नवंबर तक सतर्कता जागरूकता सप्ताह चलाया गया। यात्रियों को अलर्ट करने, उन्हें मिल रही सुविधाओं को दुरुस्त करने, अपराधों और तस्करी को रोकने के संबंध में तमाम उपलब्धियां रेल्वे की RPF और दूसरी शाखाओं ने हासिल की, मगर यात्री गाड़ियों में जिन आम समस्याओं का सामना लोगों को करना पड़ता है, उससे निजात दिलाने की दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं किये जा रहे हैं।

रूपये ऐंठने के बदल गए तरीके

अगर आप ट्रेन में सफर कर रहे हैं, तभी बोगी में अचानक किन्नरों का प्रवेश हो जाता है। वे लोगों से, खास कर युवाओं से पैसे की उगाही में लग जाते हैं। ऐसा ही नजारा कल हसदेव एक्सप्रेस में रायपुर से बिलासपुर जाते समय देखने को मिला। हद तो तब हो गई, जब एक युवक ने जेब में पैसे नहीं होने की बात कही तो किन्नर ने उसे QR कोड के जरिये पेमेंट कर देने को कह दिया। किन्नर ने सीधे अपना मोबाइल निकाला और QR कोड स्कैन करने को कहा। मरता क्या न करता, युवक ने अपने मोबाइल से स्कैन किया, तभी जाते-जाते किन्नर ने यह फरमान भी सुना दिया कि 50 रूपये डाल देना..! इस ट्रेन में RPF के कुछ जवान भी नजर आये जो बाकायदा टॉर्च से सीटों के नीचे संदिग्ध वस्तुओं को देखने के लिए सर्च करते रहे। सवाल यह है कि संयोगवश इन्हें पैसे वसूलते किन्नर नजर नहीं आये या जवानों ने इन्हे मना नहीं किया, या फिर इनकी मिलीभगत तो नहीं है।

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20 रूपये में 6 समोसे..!

शहर में आपको 20 रूपये या फिर 30 रूपये दो समोसे मिलते हैं मगर रेल गाड़ी में आपको कुछ वेंडर 20 रूपये में 6 समोसा या फिर बड़ा बेचते नजर आ जायेंगे। स्वाभाविक है इस कीमत का समोसा-बड़ा के साइज और गुणवत्ता पर फर्क तो पड़ेगा ही। वेंडर 20 रूपये में 6 छोटे-छोटे समोसे देता है, जिसको खाने पर घटिया तेल की वजह से उसका स्वाद भी कुछ अजीब सा लगता है। हालांकि यह बात और है कि इतना सस्ता समोसा देखकर कई लोग खरीदकर उसे मजे से खाते भी नजर आते हैं। ये नजारा भी हसदेव एक्सप्रेस में ही बिलासपुर से रायपुर लौटते हुए देखने को मिला।

सवाल ये है कि क्या इस तरह घटिया खाद्य सामग्रियां बेचते हुए लोग TTE अथवा RPF जवानों को नजर नहीं आते। ऐसे लोग बेधड़क इस तरह के सामान बेचते हैं। लोगों के इस तरह की सामग्रियां खरीदने की एक प्रमुख वजह ये भी है कि अधिकांश ट्रेनों में पेंट्री कार की सुविधा नहीं है। इसके अलावा वैध वेंडरों की सुविधा भी अनेक ट्रेनों में नजर नहीं आती। हालांकि वैध वेंडर की तरह IRCTC के मोनो लगे हुए ड्रेस पहने हुए लोग भी कई बार इसी तरह घटिया समोसा बेचते नजर आ चुके हैं। इन पर भी अंकुश लगाने वाला कोई नहीं है। इस तरह के नज़ारे स्लीपर और जनरल क्लास के डब्बों में देखने को मिलते हैं, जहां रेलवे के अधिकारी ज्यादातर ध्यान नहीं देते।

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RPF द्वारा समय-समय पर इनके खिलाफ कार्रवाई तो की जाती है मगर ये नज़ारे तब के हैं, जब रेल विभाग सतर्कता जागरूकता सप्ताह चला रहा होता है। बीते एक सप्ताह के दौरान रेलवे प्रबंधन द्वारा रेल सुविधाओं के बेहतरी संबंधी प्रयास के अलावा जांच के दौरान नशे की सामग्रियां और लाखों को ज्वेलरी अवैध ढंग से ले जाते हुए पकड़े जाने की कार्रवाइयां भी हुई। यह सराहनीय कार्य है, मगर रेलवे की यात्री गाड़ियों में होने वाली समस्याओं और सुवधाओं में कमी की ओर भी ध्यान देने की जरुरत है, ताकि लोग निश्चिन्त भाव से सफर कर सकें।