धमतरी। देशभर में जहां लोग दीपावली के जश्न की तैयारियों में जुटे होते हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का सेमरा सी गांव एक ऐसी अनूठी परंपरा का गवाह बनता है, जहां मुख्य तिथि से 7 दिन पहले ही दीपावली मना ली जाती है। इस गांव में केवल दीपावली ही नहीं, बल्कि होली, हरियाली और पोला जैसे चार प्रमुख त्योहार भी निर्धारित तिथि से एक सप्ताह पूर्व ही मनाने की परंपरा है।
सदियों से चली आ रही इस मान्यता के पीछे गांव के आराध्य सिरदार देव की कहानी जुड़ी हुई है। इस बार भी गांव में तय समय से पहले ही पारंपरिक उल्लास के साथ दीये जलाए गए और रंगोलियों से घर-आंगन सजे।
क्या है सिरदार देव की मान्यता और कहानी?
ग्रामीणों के अनुसार, सिरदार देव से जुड़ी यह कथा उनके पूर्वजों के समय से चली आ रही है। पुराने दौर में सेमरा सी गांव छोटे-छोटे घरों और घने जंगलों से घिरा हुआ था, जहां जंगली जानवरों और अन्य बाधाओं के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इसी दौरान सिरदार नामक एक व्यक्ति ने गांव में आकर ग्रामीणों को जंगली जानवरों के आतंक से राहत दिलाई, लेकिन इस संघर्ष में वे वीरगति को प्राप्त हो गए। कहा जाता है कि इसके बाद गांव के पुजारी को स्वप्न में सिरदार देव के निर्देश मिले, जिसके तहत ग्रामीणों को सबसे पहले उनकी पूजा-अर्चना करने और इसके बाद ही त्योहार मनाने की परंपरा शुरू करने को कहा गया। मान्यता है कि एक बार जब ग्रामीणों ने इस परंपरा को तोड़ा और तय तिथि पर त्योहार मनाने की कोशिश की, तो गांव में बीमारियां और अकाल जैसी विपत्तियां आने लगीं। तभी से ग्रामीण हर पर्व को सात दिन पहले मनाते आ रहे हैं।
मंदिर में महिलाओं का प्रवेश है वर्जित
इस गांव की परंपरा का एक और विशेष पहलू यह है कि सिरदार देव के मंदिर में महिलाओं का प्रवेश पूरी तरह वर्जित है। यहां केवल पुरुष ही मंदिर में जाकर पूजा-पाठ करते हैं। पीढ़ियों से चली आ रही इस धार्मिक व्यवस्था का आज भी पूरी श्रद्धा के साथ पालन किया जाता है।
दो दिनों तक लगता है मेले जैसा माहौल
गांव के सरपंच छबिलेश कुमार सिन्हा बताते हैं कि इस अनूठी परंपरा को देखने और त्योहार में शामिल होने के लिए आसपास के 15 से 20 गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। कई परिवार अपने रिश्तेदारों के यहां मेहमान बनकर आते हैं, जिससे गांव की आबादी से भी अधिक भीड़ जुटती है और दो दिनों तक गांव में मेले जैसा माहौल बना रहता है। युवा पीढ़ी भी पूर्वजों की इस विरासत को पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ा रही है।



