Spurious liquor racket busted छत्तीसगढ़ में आबकारी विभाग द्वारा नकली शराब के कारोबार को रोकने के लिए जो कवायद की गई उसका कोई लाभ होता नजर नहीं आ रहा है। यहां पूर्व में पदस्थ महिला आईएएस अफसर द्वारा डुप्लीकेसी को खत्म करने के लिए काफी मशक्कत की गई, मगर ऐसा लगता है कि नकली शराब बनाने वालों के लिए इसकी नकल करना और भी आसान हो चला है। तभी तो प्रदेश के कई जिलों में अब तक नकली शराब के कारोबार का खुलासा हो चुका है। गंभीर बात यह है कि इस कारोबार में सरकारी शराब बेचने वाले अमले की मिलीभगत भी उजागर हो रही है।
इसी कड़ी में डोंगरगढ़ पुलिस ने ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली शराब तैयार कर बाजार में खपाने वाले गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। जांच में नकली शराब की पैकेजिंग से लेकर फर्जी लेबल और होलोग्राम तैयार करने की पूरी प्रक्रिया सामने आई है।

ब्रांड असली शराब नकली
पुलिस जांच के मुताबिक आरोपी शराब की बोतलों की पुनर्बोतली कर उन्हें ब्रांडेड शराब का रूप देते थे। इसके बाद फर्जी लेबल, होलोग्राम और पैकेजिंग के जरिए इन्हें असली उत्पाद की तरह बाजार में खपाने की तैयारी की जाती थी।
आसानी से प्रिंट हो रहे लेबल और होलोग्राम
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के लिए नकली लेबल और होलोग्राम एक प्रिंटिंग दुकान में तैयार किए जा रहे थे। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान कंप्यूटर, लेजर प्रिंटर और मोबाइल फोन समेत बड़ी संख्या में पैकेजिंग सामग्री जब्त की है।

हजारों फर्जी लेबल और होलोग्राम जब्त
पुलिस के अनुसार जांच में करीब 3 हजार नकली लेबल और 3 हजार फर्जी होलोग्राम तैयार कराए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं एक अन्य आरोपी के कब्जे से 2100 प्लास्टिक बोतलें बरामद की गई हैं।
इससे पहले की कार्रवाई में पुलिस ने 497 पव्वे नकली शराब के साथ पैकेजिंग से जुड़ी अन्य सामग्री भी जब्त की थी। अब तक की कार्रवाई में 2.42 लाख रुपये से अधिक कीमत की सामग्री जब्त किए जाने की जानकारी है।
डिजिटल पेमेंट से जुड़े मिले सुराग
पुलिस को जांच के दौरान आरोपियों के बीच डिजिटल भुगतान के जरिए लेन-देन और संपर्क के साक्ष्य भी मिले हैं। इससे पुलिस को आशंका है कि नकली शराब का यह कारोबार एक सुनियोजित नेटवर्क के तहत संचालित किया जा रहा था।
पुलिस दोनों फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है। साथ ही नकली शराब के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, इसकी सप्लाई और बाजार में खपाई गई शराब की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
गौरतलब है कि पूर्व में नकली शराब बेचने के जितने मामले सामने आए हैं, उनमें अधिकांश में सरकारी शराब दुकानों में कार्यरत प्लेसमेंट एजेंसी के कर्मचारियों और आबकारी अमले की मिलीभगत सामने आ चुकी है। डोंगरगढ़ में जिस तरह एक नेटवर्क का खुलासा हुआ है, उससे तय है कि इस गिरोह को भी संबंधितों का संरक्षण रहा होगा, बस उन्हें पहचानने की जरूरत है।
बताया जा रहा है प्लेसमेंट एजेंसी ने जिस स्टाफ को कर्मचारियों की जिम्मेदारी दे रखी है, वह पहले से ही ऐसे मामलों में कुख्यात रहा है। बावजूद इसके आबकारी विभाग ने अब तक कोई आपत्ति नहीं की है। पिछली बार जब इस तरह के मामले और ओवररेटिंग के प्रकरण उजागर हुए तब आबकारी प्रमुख ने प्लेसमेंट एजेंसी संचालकों की बैठक लेकर उन्हें ताकीद की, इससे व्यवस्था में कोई सुधार आया हो ऐसा नजर नहीं आ रहा है।
बहरहाल ताजा मामले में पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इसके तार डोंगरगढ़ के अलावा किन-किन इलाकों तक जुड़े हुए हैं। उम्मीद की जा रही है कि जिले की पुलिस इस नेटवर्क के खुलासे में भी सफल होगी। उधर आबकारी विभाग भी जिले के लापरवाह अमले को भी दुरुस्त करेगा, ऐसी उम्मीद की जानी चाहिए।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. राजनांदगांव में नकली शराब का खेल कहां उजागर हुआ?
— डोंगरगढ़ पुलिस ने ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली शराब तैयार करने वाले गिरोह का खुलासा किया है, जिसमें 3 आरोपी गिरफ्तार और 2 फरार हैं।
Q2. पुलिस ने क्या-क्या जब्त किया है?
— करीब 3000 नकली लेबल, 3000 फर्जी होलोग्राम, 2100 प्लास्टिक बोतलें, 497 पव्वे नकली शराब, कंप्यूटर, लेजर प्रिंटर, पैकेजिंग सामग्री, कुल कीमत 2.42 लाख रुपये से अधिक।
Q3. नकली शराब कैसे बनाई जा रही थी?
— पुरानी बोतलों की पुनर्बोतली कर फर्जी लेबल-होलोग्राम लगाकर ब्रांडेड शराब के रूप में बाजार में खपाया जाता था, प्रिंटिंग दुकान में लेबल-होलोग्राम प्रिंट हो रहे थे और डिजिटल पेमेंट से नेटवर्क चल रहा था।



