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High Court grants major relief to women excluded from police recruitment

बिलासपुर। मासूम बच्चों ने चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल के समक्ष उपस्थित हो कर कहा कि हम बंदी नहीं हैं, बाल संप्रेक्षण गृह में सुरक्षित हैं। याचिकाकर्ता के पति ने ही बच्ची के साथ तीन बार दुष्कर्म किया था। बच्चों की बात सुनने के बाद कोर्ट ने दोनों बच्चों को बाल संप्रेक्षण गृह में ही रखने का निर्देश दिया है।

क्या है मामला..?

सरगुजा क्षेत्र में रहने वाली एक महिला ने अपनी नाबालिग सौतेली बहन एवं भाई को बंदी बनाकर रखे जाने की बात कहते हुए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पेश की है। याचिका में बच्चों को सुरक्षा प्रदान कराने वाली एक समाज सेविका महिला एवं बाल संप्रेक्षण गृह के अधिकारियों सहित अन्य को पक्षकार बनाया गया है।

याचिका में कहा गया था कि उसके सौतेली नाबालिग बहन एवं भाई को बंदी बनाकर रखा गया है। वह दोनों को अपने साथ रखना चाहती है। चीफ जस्टिस की डीबी में मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि बच्चों को उनके सुरक्षा के लिए बाल संप्रेक्षण गृह में रखा गया है। उन्हें बंदी नहीं बनाया गया है। कोर्ट ने इस पर दोनों बच्चों को प्रस्तुत करने का आदेश दिया।

कोर्ट के आदेश पर पुलिस सुरक्षा के बीच बच्चों को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल के समक्ष पेश किया गया। बच्चों ने कोर्ट को बताया कि वे अपनी मर्जी से बाल संप्रेक्षण गृह में रह रहे हैं, उन्हें किसी ने बंदी नहीं बनाया है। याचिकाकर्ता के पति ने ही बच्ची के साथ तीन बार दुष्कर्म किया है। इस मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। आरोपी अभी फरार है।कोर्ट ने बच्चों द्बारा दी गई पूरी जानकारी की तस्दीक कराई। बात सामने आने के बाद कोर्ट ने बच्चों को बाल संप्रेक्षण गृह में ही रखने का निर्देश दिया है। इसके साथ पूरे मामले का तथ्य एवं समाज सेविका महिला की ओर से जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय प्रदान करते हुए मामले को अगली सुनवाई हेतु 29 जून को रखने का निर्देश दिया है।