Religious conversion controversy : बस्तर जिले के नगरनार थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत उलनार में एक मतांतरित बुजुर्ग महिला के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद की स्थिति बन गई। दरअसल ग्रामीण पारंपरिक आदिवासी रीति चाहते थे, जबकि परिजन ईसाई पद्धति से अंतिम संस्कार पर अड़े थे। पुलिस और प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ और सहमति से शव को करकापाल के ईसाई कब्रिस्तान ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया।

क्या है पूरा मामला ?

Religious conversion controversy : ग्राम उलनार निवासी लखी कश्यप (70 वर्ष) का निधन अस्पताल में उपचार के दौरान हुआ था। ग्रामीणों के अनुसार मृतका पिछले कुछ वर्षों से ईसाई धर्म का पालन कर रही थीं। 

मृत्यु के बाद ग्रामीणों ने परिजनों से पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार करने की मांग की। वहीं परिजन ईसाई पद्धति से दफनाने पर अड़े रहे। इस कारण ग्राम पंचायत ने स्थानीय मुक्तिधाम में ईसाई पद्धति से दफन की अनुमति नहीं दी।

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पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में सुलझा मामला

Religious conversion controversy : विवाद की सूचना मिलते ही नगरनार थाना पुलिस मौके पर पहुंची। थाना प्रभारी की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच चर्चा कराई गई। आपसी समझाइश के बाद सहमति बनी कि मृतका का अंतिम संस्कार करकापाल स्थित ईसाई कब्रिस्तान में किया जाएगा। इसके बाद शव को वहां ले जाकर ईसाई रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।

परिवार में 3 दिन में दूसरा निधन

ग्रामवासी तुलसी बघेल ने बताया कि मृतका लखी कश्यप के पति सदन कश्यप का भी तीन दिन पहले निधन हुआ था। उनका अंतिम संस्कार भी ईसाई पद्धति से किया गया था।

बड़ी संख्या में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद

Religious conversion controversy : समझाइश के दौरान मौके पर सरपंच मधुसूदन नेताम, देवधन कश्यप, विभाग संयोजक सिकंदर कश्यप, विहिप जिला धर्म प्रसार प्रमुख देवेंद्र कश्यप, जिला सत्संग प्रमुख तुलसीराम बघेल, ग्राम पटेल कौड़ीराम पटेल, ग्राम पुजारी लिंगोराम, सिरहा रघुनाथ कश्यप सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

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बस्तर में रीति-रिवाज और धर्मांतरण को लेकर इस तरह के विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं। प्रशासन की त्वरित पहल और दोनों पक्षों की सहमति से इस बार तनाव बढ़ने से पहले ही मामला शांत हो गया।