रायपुर। जगदलपुर की गलियों में इन दिनों आवारा कुत्तों का खौफ तो है ही, लेकिन उससे ज्यादा चर्चा नगर निगम के एक अनोखे कदम की हो रही है। आमतौर पर निगम जब किसी कुत्ते को पकड़ता है तो जाल और डंडों का शोर होता है। मगर महाराणा प्रताप वार्ड में नजारा बिल्कुल उल्टा था। यहां आवारा कुत्तों को पहले वीआईपी ट्रीटमेंट दिया गया, फिर उनकी आरती उतारी गई और उसके बाद नसबंदी की प्रक्रिया शुरू हुई।

महाराणा प्रताप वार्ड के एसएलआरएम डोंगरी सेंटर में जब ‘एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर’ का रिबन कटना था, तो माहौल किसी मंदिर जैसा हो गया। सामने आवारा कुत्ते शांत बैठे थे। अधिकारी और नेता हाथ में पूजा की थाली लेकर खड़े थे। बाकायदा कुत्तों के माथे पर तिलक लगाया गया। उनकी आरती उतारी गई। इतना ही नहीं, उन्हें बड़े प्यार से दूध भी पिलाया गया। जिसने भी यह देखा, अपनी आंखों पर यकीन नहीं कर पाया।

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महापौर ने खुद की पूजा

इस पूरे ड्रामे की अगुवाई खुद महापौर संजय पाण्डेय कर रहे थे। उन्होंने पहले श्वान देव की पूजा की और फिर शहर की जनता से अपील की कि वे इस काम में साथ दें। निगम का कहना है कि शहर में डॉग बाइट की घटनाएं बढ़ गई हैं। रात को कुत्तों के झुंड से लोग डरते हैं। इसी रेबीज के खतरे को खत्म करने के लिए यह महाअभियान शुरू हुआ है। पर चर्चा नसबंदी की कम और इस श्वान सम्मान समारोह की ज्यादा हो रही है।

सोशल मीडिया पर खिंचाई और सवाल

जैसे ही इस पूजा-पाठ की तस्वीरें बाहर आईं, सोशल मीडिया पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई। लोग मजे लेने लगे। किसी ने लिखा कि जगदलपुर में अब नसबंदी कराने के लिए भी धार्मिक संस्कार जरूरी हैं। कुछ यूजर्स ने तो यहां तक कह दिया कि इतना मान-सम्मान तो कई बार इंसानों को भी सरकारी दफ्तरों में नहीं मिलता। कोई इसे निगम का पीआर स्टंट बता रहा है, तो कोई इसे जानवरों के प्रति संवेदनशीलता कह रहा है।

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नगर निगम ने इस काम के लिए तगड़ी तैयारी की है। एक पूरी प्रशासनिक टीम लगाई गई है। खास बात ये है कि इसमें पशु प्रेमियों को भी शामिल किया गया है। टीम का काम यह देखना है कि कुत्तों को पकड़ने या उनके ऑपरेशन में किसी तरह की बेरहमी न हो। फिलहाल तो पूरा जगदलपुर यही कह रहा है कि सरकारी फाइलें जब पूजा की थाली तक पहुंचती हैं, तो धमाका तो होता ही है।