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कलिंगा विश्वविद्यालय में ‘हरित ऊर्जा और जलवायु समाधान’ पर अटल वाणी राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

रायपुर। कलिंगा विश्वविद्यालय, नया रायपुर के विज्ञान संकाय एवं प्रौद्योगिकी संकाय के वनस्पति विज्ञान और सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग ने दो दिवसीय एआईसीटीई (AICTE) प्रायोजित ‘भारतीय भाषाओं की उन्नति और पोषण के लिए अटल वाइब्रेंट एडवोकेसी (VAANI) संगोष्ठी 2026-27’ का सफलतापूर्वक आयोजन किया। 24–25 सितंबर 2026 को आयोजित यह द्विभाषी संगोष्ठी (अंग्रेजी और बंगाली) “हरित ऊर्जा […]

कलिंगा विश्वविद्यालय में ‘हरित ऊर्जा और जलवायु समाधान’ पर अटल वाणी राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

रायपुर। कलिंगा विश्वविद्यालय, नया रायपुर के विज्ञान संकाय एवं प्रौद्योगिकी संकाय के वनस्पति विज्ञान और सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग ने दो दिवसीय एआईसीटीई (AICTE) प्रायोजित ‘भारतीय भाषाओं की उन्नति और पोषण के लिए अटल वाइब्रेंट एडवोकेसी (VAANI) संगोष्ठी 2026-27’ का सफलतापूर्वक आयोजन किया। 24–25 सितंबर 2026 को आयोजित यह द्विभाषी संगोष्ठी (अंग्रेजी और बंगाली) “हरित ऊर्जा और जलवायु समाधान: एक सतत राष्ट्र के लिए रणनीतियाँ” विषय पर केंद्रित थी। इस पहल का उद्देश्य बहुभाषी शैक्षणिक संचार को बढ़ावा देना और भारतीय भाषाओं के माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करना था।

संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि बी. आनंद बाबू, सेवानिवृत्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (2024-25) एवं निदेशक, छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम तथा छत्तीसगढ़ राज्य वन अनुसंधान संस्थान द्वारा किया गया। संगोष्ठी का आयोजन कुलपति डॉ. आर. श्रीधर, विज्ञान संकाय के प्रभारी अधिष्ठाता एवं अकादमिक मामलें के उप-अधिष्ठाता डॉ. बेंदी अंजनेयुलु के मार्गदर्शन तथा आईक्यूएसी (IQAC) की निदेशक डॉ. विजयलक्ष्मी बिरादार और विभिन्न संकायों के अधिष्ठाताओं तथा विभागाध्यक्षों की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया।
संगोष्ठी का संयोजन वनस्पति विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. दीपा बिस्वास और सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. प्रियंवदा सिंह द्वारा किया गया।

इस संगोष्ठी में देशभर के 13 संस्थानों से 70 से अधिक प्रतिभागी एक साथ आए, जिससे शैक्षणिक आदान-प्रदान और सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा मिला। गणमान्य व्यक्तियों ने वैज्ञानिक इनोवेशन, अलग-अलग विषयों से जुड़ी रिसर्च और टिकाऊ तकनीकी तरक्की के ज़रिए सामाजिक चुनौतियों से निपटने में ग्रीन टेक्नोलॉजी, जलवायु परिवर्तन और नैनो-टेक्नोलॉजी की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने और एकेडमिक उत्कृष्टता व रिसर्च को प्रोत्साहित करने में बंगाली भाषा में होने वाले द्विभाषी राष्ट्रीय सेमिनारों के महत्व पर भी ज़ोर दिया।

इस संगोष्ठी ने प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, पर्यावरण विशेषज्ञों, संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और छात्रों को एक मंच पर लाया तथा सतत प्रौद्योगिकियों, जलवायु लचीलेपन (climate resilience), नवीकरणीय ऊर्जा, चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था (circular bioeconomy), अपशिष्ट प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण पर गहन विचार-विमर्श किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य एआईसीटीई अटल वाणी पहल के उद्देश्यों के अनुरूप बहुविषयक चर्चाओं के माध्यम से वैज्ञानिक ज्ञान और पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देना था। सभी तकनीकी सत्र अंग्रेजी और बंगाली दोनों भाषाओं में आयोजित किए गए, जिससे प्रतिभागियों के बीच व्यापक भागीदारी और वैज्ञानिक अवधारणाओं का प्रभावी प्रसार संभव हो सका।

दो दिवसीय संगोष्ठी के दौरान, प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए, जिनमें कृषि-वानिकी और लघु वन उपज, सतत प्राकृतिक रेशा प्रौद्योगिकियाँ, जलवायु-अनुकूल फसल विकास, चक्रीय अपशिष्ट प्रबंधन, जैव-ऊर्जा और जैव-उर्वरक उत्पादन के लिए हरित प्रौद्योगिकियाँ, जलवायु शमन रणनीतियाँ, आपदा प्रबंधन में एआई (AI) एवं आईओटी (IoT) के अनुप्रयोग, उन्नत अपशिष्ट जल नैनो-प्रौद्योगिकी, वन्यजीव संरक्षण, तथा चक्रीय अर्थव्यवस्था एवं संसाधन संरक्षण शामिल थे।

तकनीकी सत्रों ने नवीकरणीय ऊर्जा, संसाधन पुनःप्राप्ति (resource recovery), सतत कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), नैनो-प्रौद्योगिकी और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण के माध्यम से जलवायु परिवर्तन से निपटने के नवोन्मेषी दृष्टिकोणों पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञों ने सतत राष्ट्रीय विकास के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान को व्यावहारिक समाधानों में बदलने के महत्व पर भी बल दिया।

संकाय सदस्यों, स्नातकोत्तर (Postgraduate) छात्रों और शोधार्थियों ने संवादात्मक चर्चाओं और ज्ञान-साझाकरण सत्रों के माध्यम से संगोष्ठी में सक्रिय रूप से भाग लिया। संगोष्ठी का समापन सतत अनुसंधान, नवाचार और पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देने के साथ-साथ वैज्ञानिक शिक्षा और प्रसार में भारतीय भाषाओं, विशेष रूप से अंग्रेजी और बंगाली की भूमिका को सुदृढ़ करने की सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

Rverma
लेखक / पत्रकार:

Rverma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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