Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का तरीका बदलने की तैयारी है। अब विद्यार्थी केवल किताबों और ब्लैकबोर्ड तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि डिजिटल माध्यम से भी पढ़ाई कर सकेंगे। समग्र शिक्षा के तहत रायपुर जिले के 155 सरकारी स्कूलों को स्मार्ट क्लासरूम योजना में शामिल किया गया है। इन कक्षाओं में 65 इंच की 4के टच स्क्रीन लगाई जाएंगी, जिनकी मदद से पढ़ाई को अधिक रोचक और आसान बनाया जा सकेगा।
रायपुर जिले के आरंग, तिल्दा, धरसींवा और अभनपुर विकासखंड के सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम तैयार किए जाएंगे। योजना के तहत आरंग के 44, तिल्दा के 40, धरसींवा के 32 और अभनपुर के 39 स्कूलों का चयन किया गया है। इन स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से डिजिटल बोर्ड लगाए जाएंगे। चयनित स्कूलों में माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर के संस्थान शामिल हैं।
डिजिटल बोर्ड से पढ़ाई होगी आसान
स्मार्ट क्लासरूम में लगने वाली 65 इंच की 4के इंटरैक्टिव टच स्क्रीन के जरिए शिक्षक डिजिटल सामग्री का इस्तेमाल कर सकेंगे। विद्यार्थी पाठ्यपुस्तकों के साथ-साथ चित्रों, डिजिटल एनीमेशन, त्रिआयामी चित्रों और ऑडियो-वीडियो के माध्यम से भी विषयों को समझ पाएंगे। इससे विज्ञान और गणित जैसे विषयों की जटिल अवधारणाओं को दृश्य माध्यम से समझाने में मदद मिल सकती है।
चरणबद्ध तरीके से होगा स्मार्ट क्लास का निर्माण
जिला शिक्षा अधिकारी सतीश कुमार नायर के अनुसार, रायपुर जिले के 155 स्कूलों का चयन स्मार्ट क्लासरूम तैयार करने के लिए किया गया है। इन कक्षाओं का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। योजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में भी आधुनिक शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से पढ़ने और सीखने का अवसर मिल सके।
पीएमश्री स्कूलों को मिलेगा अतिरिक्त डिजिटल सेटअप
पीएमश्री विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम के साथ अतिरिक्त डिजिटल सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की तैयारी है। इनमें 5जी डोंगल, वेबकैम, कॉन्फ्रेंस माइक और वाई-फाई सुविधा वाला डेटा कार्ड शामिल है। इस व्यवस्था के जरिए ऑनलाइन कक्षाएं और वर्चुअल लैब जैसी गतिविधियां संचालित करने में मदद मिल सकती है। इससे विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से पढ़ाई के अतिरिक्त अवसर मिलेंगे।
स्मार्ट बोर्ड लगाने के लिए जरूरी होंगी ये व्यवस्थाएं
स्मार्ट क्लासरूम में उपकरण लगाने से पहले स्कूल के कमरे को सीलन-मुक्त, साफ और रंग-रोगन युक्त रखना जरूरी होगा। खिड़की-दरवाजों की स्थिति ठीक होने के साथ बिजली की सुरक्षित वायरिंग, उचित अर्थिंग और बेहतर विद्युत व्यवस्था भी अनिवार्य होगी। संबंधित एजेंसी उपकरणों को स्कूल तक पहुंचाकर स्थापित करेगी। साथ ही शिक्षकों को स्मार्ट बोर्ड चलाने और उसका इस्तेमाल पढ़ाई में करने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।



