स्टैंडअप कॉमेडियन समय रैना
सुप्रीम कोर्ट ने स्टैंडअप कॉमेडियन समय रैना समेत 5 कलाकारों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर रद्द कर दी हैं।

India’s Got Latent Controversy: स्टैंडअप कॉमेडियन समय रैना को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनके शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ में दिव्यांग व्यक्तियों को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़े मामले में समय रैना और चार अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी रद्द करने का आदेश दिया है। अदालत ने हालांकि साफ किया कि दिव्यांग व्यक्तियों से जुड़े कंटेंट को लेकर व्यापक मुद्दे पर सुनवाई आगे जारी रहेगी।

भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। अदालत ने माना कि आरोपियों ने पहले दिए गए निर्देशों के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए धन जुटाने की दिशा में प्रयास किए हैं।

इन पांच लोगों को मिली राहत
FIR रद्द किए जाने से समय रैना के अलावा विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर उर्फ सोनाली आदित्य देसाई और निशांत जगदीश तंवर को राहत मिली है। इससे पहले शीर्ष अदालत ने आरोपियों को सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए थे। पिछली सुनवाई में अदालत ने उन पर कुल तीन लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। कोर्ट ने उस समय कहा था कि दिए गए आश्वासनों का पूरी तरह पालन नहीं किए जाने से अदालत को गुमराह करने की स्थिति बनी।

क्या था पूरा मामला?
यह विवाद ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के उस एपिसोड से जुड़ा है, जिसमें दिव्यांग व्यक्तियों और स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी से संबंधित कथित असंवेदनशील टिप्पणियों को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि कार्यक्रम के दौरान स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी के इलाज की लागत और दिव्यांग व्यक्ति को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। विवादित एपिसोड 14 नवंबर 2024 को मुंबई के खार हैबिटेट में शूट किया गया था और बाद में इसे प्रसारित किया गया था। इसके बाद कार्यक्रम से जुड़े कई लोगों के खिलाफ अलग-अलग स्थानों पर आपराधिक मामले दर्ज किए गए।

कोर्ट ने क्यों रद्द कीं FIR?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समय रैना और अन्य आरोपियों ने अदालत के निर्देशों के बाद जागरूकता बढ़ाने और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आर्थिक सहायता जुटाने की दिशा में ईमानदार प्रयास किए हैं। पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि यदि युवा सकारात्मक दिशा में काम करते हैं तो उसके अच्छे परिणाम सामने आ सकते हैं। इसी आधार पर अदालत ने समय रैना और चार अन्य से संबंधित आपराधिक कार्यवाही समाप्त करने का आदेश दिया।

लेकिन दिव्यांगों से जुड़े कंटेंट पर मामला अभी खत्म नहीं
FIR रद्द होने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले के व्यापक पहलू को खुला रखा है। अदालत अब इस बात पर विचार करेगी कि दिव्यांग व्यक्तियों से संबंधित कंटेंट को लेकर बेहतर नियंत्रण और संवेदनशीलता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। अदालत का उद्देश्य इस विषय पर आवश्यक दिशा-निर्देश तय करना और भविष्य में ऐसे मामलों से निपटने के लिए उचित व्यवस्था पर विचार करना है।

रणवीर इलाहाबादिया की याचिका अभी लंबित
‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ विवाद में यूट्यूबर और उद्यमी रणवीर इलाहाबादिया का नाम भी सामने आया था। उनके खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर उनकी याचिका सुप्रीम कोर्ट में अभी लंबित है। इससे पहले शीर्ष अदालत ने उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया था। इस तरह समय रैना और चार अन्य के लिए शुक्रवार का फैसला बड़ी राहत लेकर आया है, लेकिन ऑनलाइन कंटेंट में दिव्यांग व्यक्तियों के चित्रण और उससे जुड़े नियमन का व्यापक मुद्दा अभी सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन रहेगा।

नवीन कुमार साहू को पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 5 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से Bachelor of Science (Electronic Media) और Master of Science (Electronic Media) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है।