रायपुर। आयुष्मान योजना के अंतर्गत इलाज किए हुए मरीजों के  क्लेम प्रोसेसिंग हेतु एजेंसी थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (टी पी ए) निर्धारित करने की मई- जून  से जारी टेंडर प्रक्रिया निरस्त कर दी गई है। ज्ञात हो कि कई चरणों में जारी  के निविदा प्रक्रिया की अंतिम तिथि कई दिनों से टाली जा रही थी। अगस्त माह में अंतिम निर्णय कई बार रोका गया था।

अंतिम चरण में ई मेडिटेक और मेडी एसिस्ट केवल दो टी पी ए एजेंसी इच्छुक रह गई थी ।15 दिन पहले एक एजेंसी निविदा में  अप्रासंगिक शर्तों के कारण अंतिम समय में हट गई थी। एक ही टी पी ए रहने के कारण इस प्रक्रिया को निरस्त किया गया है ।

संभावना है कि टी पी ए निर्धारण की प्रक्रिया फिर से अगले माह शुरू की जाएगी। मार्च 25 के बाद क्लेम प्रोसेसिंग कंपनी का कार्यकाल खत्म होने पर यही कंपनी बिना अधिकृत कार्य आवंटन पत्र के सरकारी अस्पतालों की क्लेम प्रोसेसिंग कर रही थी। सूत्रों के अनुसार प्रोसेसिंग कार्य ग्रामीण चिकित्सा बॉन्ड पोस्टिंग  चिकित्सकों और एस एन ए के कंप्यूटर ऑपरेटरों द्वारा किया जा रहा था. टेंडर प्रक्रिया दोबारा शुरू होने से  क्लेम प्रोसेसिंग के लिए पड़े लंबित भुगतान में और देरी होनेकी आशंका है।

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लंबित भुगतान को लेकर प्रयास शुरू

रायपुर (25.08.2025) पिछले एक सप्ताह से आयुष्मान योजना के लंबित भुगतान को लेकर आई विषम परिस्थितियों और स्वास्थ्य विभाग की नाइंसाफी के रुख को देखते हुए न्याय पाने के लिए संभावित रणनीति और रूपरेखा पर एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ़ इंडिया (एएचपीआई) ने राज्य स्तर पर सभी जिला इकाइयों से विचार विमर्श करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

अलग-अलग जिला स्तर के अस्पताल संगठनों से बातचीत करने पर यह बात सामने आई है कि रायपुर बिलासपुर दुर्ग राजनांदगांव सहित करीब-करीब सभी जिलों में जनवरी 2025 के बाद भारी मात्रा में प्रति मरीज आंशिक और संशोधित भुगतान और क्लेम रिजेक्शन की प्रक्रिया हुई है। इसके साथ ही लगभग सभी अस्पतालों में उपरोक्त अवधि के पूरे भुगतान बाकी हैं जो आयुष्मान पोर्टल पर भी परिलक्षित हो रहे हैं। सबसे निराशाजनक और रोष भरी बात यह है कि इस संबंध में स्टेट नोडल एजेंसी ने किसी प्रकार की आधिकारिक सूचना अस्पतालों को नहीं दी है। ए एच पी आई ने सभी सदस्य अस्पतालों को नेशनल हेल्थ अथॉरिटी में लंबित भुगतान की आधिकारिक जानकारी देते हुए प्रक्रिया से अवगत कराया है ताकि अगले 24 घंटे में सभी अस्पताल नेशनल हेल्थ पोर्टल में जनवरी से मार्च 25 के भुगतान न होने की आधिकारिक जानकारी दे सकें।

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विचार विमर्श में यह बात सामने आई है कि एक आधिकारिक मीटिंग में सभी सदस्य अस्पतालों की उपस्थिति में आगे की रणनीति बनाकर आयुष्मान योजना में सेवाएं देने के बारे में नीतिगत निर्णय लिया जाए।

विभिन्न राज्यों में आयुष्मान का एक लाख करोड़ रुपए बकाया

ज्ञात हो कि राष्ट्रीय मीडिया में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र से लेकर मणिपुर तक एक लाख करोड रुपए निजी क्षेत्रों के आयुष्मान अस्पतालों का लंबित होने की जानकारी आधिकारिक रूप से सामने आई है।

आगामी दिनों में वित्तीय अनुमति न होने के कारण इस स्थिति का सामना छत्तीसगढ़ के अस्पताल भी करेंगे ऐसी पूरी आशंका है। सभी अस्पतालों में असुरक्षा की भावना है और अस्पताल मरीजों को अनाधिकृत रूप से इलाज के लिए मना कर रहे हैं।