कैंसर के इलाज में क्यों झड़ने लगते हैं बाल
कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी के कारण बाल झड़ना एक अस्थायी प्रक्रिया है, जो उपचार खत्म होने के बाद स्वतः ठीक हो जाती है।

Cancer Treatment Hair Loss: कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के दौरान कीमोथेरेपी की वजह से मरीजों के बाल झड़ने लगते हैं, जिसे लेकर लोगों में अक्सर चिंता और डर की भावना बनी रहती है। दिल्ली के एक्शन कैंसर हॉस्पिटल के एक्शन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल ऑन्कोलॉजी एंड इम्यूनोथेरेपी के डायरेक्टर डॉ. जे.बी. शर्मा के अनुसार, कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कीमोथेरेपी दवाएं तेजी से बढ़ने वाली कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए डिजाइन की जाती हैं। हालांकि, इस प्रक्रिया में हमारे शरीर की अन्य तेजी से बढ़ने वाली स्वस्थ कोशिकाएं, जैसे कि बालों की जड़ें (हेयर फॉलिकल्स), भी प्रभावित हो जाती हैं। यही मुख्य कारण है कि कीमोथेरेपी शुरू होने के कुछ हफ्तों के भीतर मरीजों के बाल तेजी से गिरने लगते हैं।

चिकित्सकीय आंकड़ों और विशेषज्ञों के अनुभव के मुताबिक, कीमोथेरेपी की पहली या दूसरी साइकिल शुरू होने के लगभग 2 से 3 हफ्तों के भीतर बाल झड़ने की प्रक्रिया शुरू होती है। यह असर केवल सिर के बालों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कई मरीजों में भौहें (आईब्रो), पलकें (आईलैश) और शरीर के अन्य अंगों के बाल भी प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, हर मरीज पर दवाइयों का असर एक जैसा नहीं होता और न ही हर कीमोथेरेपी दवा से पूरी तरह से बाल झड़ते हैं। दवाओं की खुराक, प्रकार और मरीज की शारीरिक स्थिति के आधार पर बालों के गिरने की तीव्रता अलग-अलग हो सकती है।

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कीमोथेरेपी का दवाओं और कोशिकाओं पर असर
कैंसर की कोशिकाएं शरीर में बहुत तेजी से विभाजित होती हैं, और कीमोथेरेपी दवाएं इसी तीव्र विभाजन को रोकने का काम करती हैं। दुर्भाग्य से, मानव शरीर में बालों की जड़ों की कोशिकाएं भी बहुत तेजी से विभाजित और विकसित होती हैं। जब कीमोथेरेपी का प्रभाव शरीर में फैलता है, तो दवाएं कैंसर कोशिकाओं और बालों की स्वस्थ कोशिकाओं के बीच अंतर नहीं कर पातीं। इसके परिणामस्वरूप बालों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं और बाल गिरने लगते हैं।

क्या इलाज के बाद दोबारा उग आते हैं बाल?
कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि कीमोथेरेपी की वजह से बालों का झड़ना पूरी तरह से एक अस्थायी साइड इफेक्ट है, जिससे घबराने या निराश होने की जरूरत नहीं है। जैसे ही मरीज का कीमोथेरेपी सेशन पूरा होता है, उसके कुछ हफ्तों या महीनों बाद बालों की जड़ों में नई कोशिकाओं का विकास फिर से शुरू हो जाता है। शुरुआती दौर में जब नए बाल उगते हैं, तो उनका रंग, घनत्व या टेक्सचर (जैसे सीधे या घुंघराले होना) पहले की तुलना में थोड़ा अलग हो सकता है। समय के साथ ज्यादातर मरीजों के बाल अपनी स्वाभाविक स्थिति में वापस आ जाते हैं।

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कैंसर विशेषज्ञों और डॉक्टरों की राय
कीमोथेरेपी का मुख्य लक्ष्य मरीज के शरीर से कैंसर कोशिकाओं को खत्म कर उसकी जिंदगी बचाना है। ट्रीटमेंट के दौरान हेयर फॉलिकल्स का प्रभावित होना एक आम बात है। मरीजों को यह समझना चाहिए कि बाल दोबारा उगाए जा सकते हैं, लेकिन कैंसर का सही समय पर और पूरा इलाज होना जीवन रक्षा के लिए सर्वोपरि है। यदि बाल झड़ने को लेकर कोई मानसिक तनाव या भ्रम हो, तो अपने ऑन्कोलॉजिस्ट से खुलकर सलाह लेनी चाहिए।”

मरीजों की जीवनशैली पर असर
बाल झड़ने का असर मरीज के शारीरिक स्वास्थ्य से ज्यादा उसके मानसिक और भावनात्मक स्तर पर पड़ता है। ऐसे समय में परिजनों का सहयोग, सही पोषण और संतुलित आहार मरीज के आत्मविश्वास को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उपचार के दौरान हल्की मालिश, माइल्ड व सल्फेट-फ्री शैम्पू का उपयोग और स्कैल्प को धूप व धूल से बचाना बेहद फायदेमंद साबित होता है। इसके अलावा, कई मरीज इस दौरान सूती स्कार्फ, कैप या विग का सहारा लेकर अपने दैनिक जीवन को सामान्य रूप से व्यतीत करते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. कीमोथेरेपी शुरू होने के कितने दिन बाद बाल झड़ने लगते हैं?
उत्तर: आमतौर पर कीमोथेरेपी उपचार शुरू होने के 2 से 3 हफ्ते बाद बाल झड़ने की शुरुआत हो सकती है।

Q. क्या कीमोथेरेपी खत्म होने के बाद बाल दोबारा उग आते हैं?
उत्तर: हां, कीमोथेरेपी पूरी होने के कुछ हफ्तों या महीनों बाद बाल प्राकृतिक रूप से दोबारा उगने लगते हैं।

Q. क्या कैंसर के हर मरीज के बाल कीमोथेरेपी से गिरते हैं?
उत्तर: नहीं, यह इस्तेमाल की जाने वाली दवाइयों के प्रकार, खुराक और मरीज के शरीर की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है।

Q. इलाज के दौरान स्कैल्प और बालों की देखभाल कैसे करें?
उत्तर: माइल्ड शैम्पू का इस्तेमाल करें, बालों पर कड़े केमिकल या कलर न लगाएं, और स्कैल्प को साफ व मॉइश्चराइज रखें।

Q. क्या नए उगने वाले बालों का रंग या टेक्सचर बदल सकता है?
उत्तर: हां, शुरुआत में उगने वाले नए बालों का रंग, मोटाई या घुंघरालापन पहले के बालों से थोड़ा अलग हो सकता है।

नवीन कुमार साहू को पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 5 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से Bachelor of Science (Electronic Media) और Master of Science (Electronic Media) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें छत्तीसगढ़, राष्ट्रीय समाचार, राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन का अनुभव है। वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार एवं लेख तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक और उपयोगी जानकारी सरल भाषा में पहुंचाना है।