डायबिटीज में पैरों की देखभाल के लिए पैरों की जांच और स्वच्छता करता हुआ व्यक्ति
डायबिटीज में पैरों की नियमित देखभाल और सही जूतों का चयन नसों के नुकसान से बचा सकता है।

Health Care Tips: स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अनियंत्रित ब्लड शुगर लंबे समय तक बने रहने से मरीजों के पैरों की नसों और रक्त वाहिकाओं को गंभीर नुकसान पहुँचता है। इस स्थिति के कारण पैरों में संवेदना खत्म होने, घाव न भरने और गंभीर संक्रमण होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज की रिपोर्ट बताती है कि समय पर ध्यान न देने से छोटी सी खरोंच भी बड़े खतरे का रूप ले सकती है। ऐसे में नियमित जांच, सही जीवनशैली और शुरुआती लक्षणों की पहचान करके मरीज किसी भी संभावित जटिलता से पूरी तरह बच सकते हैं।

जब शरीर में शर्करा का स्तर लगातार ऊंचा रहता है, तो यह पैरों की सूक्ष्म नसों को क्षति पहुँचाना शुरू कर देता है। इस चिकित्सकीय अवस्था को ‘डायबिटिक न्यूरोपैथी’ कहा जाता है। इसके कारण पैरों में सुन्नपन, जलन, सुई चुभने जैसी झनझनाहट और लगातार दर्द रहने लगता है। संवेदना कम होने की वजह से कई बार मरीज को पैर में जूते से छिलने, कट लगने या छाले पड़ने का अहसास तक नहीं होता। इसके अलावा, पैरों की धमनियों में रक्त संचार धीमा पड़ने से शरीर की प्राकृतिक हीलिंग क्षमता प्रभावित होती है, जिससे साधारण चोट भी जिद्दी घाव में बदल जाती है।

पैरों से जुड़ी है कई समस्याएं
स्वास्थ्य अध्ययनों से यह साबित हुआ है कि मधुमेह के मरीजों में कुल शारीरिक समस्याओं में से लगभग 30 से 40 प्रतिशत मामले पैरों से जुड़ी जटिलताओं के होते हैं। पहले के दौर में जानकारी के अभाव के कारण अक्सर मरीज अंतिम चरणों में अस्पताल पहुँचते थे, जहाँ संक्रमण फैलने के कारण कड़े कदम उठाने पड़ते थे। हालांकि, आधुनिक प्रिवेंटिव हेल्थकेयर तकनीक और शुरुआती जागरूकता अभियानों की मदद से अब ऐसे मामलों में भारी कमी दर्ज की गई है।

क्या कहते है स्वास्थ्य विशेषज्ञ
एक्सपर्ट का कहना है कि मधुमेह के रोगियों को अपनी दैनिक दिनचर्या में पैरों का निरीक्षण जरूर शामिल करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, दवाओं और खान-पान के साथ-साथ त्वचा और तंत्रिका तंत्र की सुरक्षा उतनी ही आवश्यक है। यदि पैर की त्वचा का रंग बदलने लगे, तापमान बहुत गर्म या ठंडा महसूस हो या कोई छोटा घाव तीन से चार दिनों में ठीक न हो, तो बिना देर किए विशेषज्ञ से परामर्श लें। खुद से इलाज करने या मलहम लगाने से परहेज करना चाहिए।

मरीजों की जीवनशैली पर प्रभाव
यदि मरीज समय रहते सही सावधानियां बरतते हैं, तो वे भविष्य में होने वाले किसी भी बड़े जोखिम से सुरक्षित रह सकते हैं। सही फिटिंग वाले आरामदायक जूतों का चयन करना, नंगे पैर चलने से परहेज करना और पैरों की सफाई पर ध्यान देना मरीजों की दैनिक गुणवत्ता में सुधार लाता है। इससे न केवल अस्पताल के चक्कर लगाने का मानसिक और वित्तीय तनाव कम होता है, बल्कि व्यक्ति बिना किसी शारीरिक बाधा के अपनी सामान्य जीवनशैली का आनंद ले पाता है।डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जिसके साथ सही प्रबंधन के जरिए लंबा और स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है। पैरों की नियमित स्वच्छता, मॉइस्चराइजर का सही इस्तेमाल और ब्लड शुगर नियंत्रण से किसी भी बड़ी चिकित्सीय आपात स्थिति से बचा जा सकता है। आने वाले समय में नियमित चेकअप और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता ही मरीजों के लिए सबसे बड़ा रक्षा कवच साबित होगी।

नवीन कुमार साहू को पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 5 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से Bachelor of Science (Electronic Media) और Master of Science (Electronic Media) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें छत्तीसगढ़, राष्ट्रीय समाचार, राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन का अनुभव है। वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार एवं लेख तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक और उपयोगी जानकारी सरल भाषा में पहुंचाना है।