नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने खाद्य कारोबार से जुड़े व्यवसायों को बड़ी राहत देते हुए FSSAI के नियमों में अहम बदलाव किया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (लाइसेंसिंग एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ फूड बिजनेस) रेगुलेशंस, 2011 में संशोधन की अधिसूचना जारी कर दी है। इसका मकसद ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना और अनावश्यक नियामकीय बोझ कम करना है।

गैर-विनिर्माण कारोबारियों को मिली छूट

नए नियमों के तहत अब गैर-विनिर्माण खाद्य कारोबारियों को कुछ रिकॉर्ड रखने और स्टॉक रोटेशन से जुड़े नियमों का पालन करने से छूट मिलेगी। पहले सभी लाइसेंसधारी खाद्य कारोबारियों के लिए फर्स्ट इन फर्स्ट आउट (FIFO) या फर्स्ट एक्सपायरी फर्स्ट आउट (FEFO) के आधार पर स्टॉक का प्रबंधन और रिकॉर्ड रखना अनिवार्य था। 

अब यह व्यवस्था केवल खाद्य निर्माण इकाइयों पर ही लागू होगी। सरकार का मानना है कि इससे खुदरा विक्रेताओं और अन्य गैर-विनिर्माण खाद्य व्यवसायों, खासकर छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारियों (MSME) पर अनुपालन का बोझ काफी कम होगा।

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खाद्य निर्माताओं पर पहले जैसे नियम

हालांकि, खाद्य निर्माण करने वाले कारोबारियों के लिए ये नियम पहले की तरह लागू रहेंगे, ताकि खाद्य सुरक्षा, गुणवत्ता और उत्पाद की ट्रेसबिलिटी से कोई समझौता न हो। जहां निगरानी जरूरी है, वहां नियंत्रण पहले की तरह मजबूत बना रहेगा।

जोखिम आधारित नियामकीय व्यवस्था पर जोर

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला खाद्य क्षेत्र में जोखिम आधारित और परिणाम केंद्रित नियामकीय व्यवस्था को बढ़ावा देने की व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने कई नियम आसान किए हैं, जिनमें स्थायी लाइसेंस, टर्नओवर सीमा में संशोधन, स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के लिए दोहरे अनुपालन की अनिवार्यता खत्म करना और जोखिम आधारित निरीक्षण प्रणाली शामिल है।

मंत्रालय के अनुसार, नए संशोधन राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सभी हितधारकों के साथ चर्चा के बाद तैयार किए गए हैं। ये बदलाव नीति आयोग की गैर-वित्तीय नियामकीय सुधारों पर गठित उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों के अनुरूप भी हैं।

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