चीनी की जगह गुड़ और शहद के इस्तेमाल को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ की राय
चीनी की जगह गुड़ या शहद लेने से क्या वाकई कम होती है शुगर और कैलोरी? जानिए एक्सपर्ट की राय।

Health Tips: चाय की चुस्की के साथ कुछ लोगों के लिए चीनी छोड़ना आसान नहीं होता। ऐसे में जब सेहत को लेकर जागरूकता बढ़ी है, बहुत से लोग सफेद चीनी की जगह गुड़, शहद या जैगरी पाउडर का इस्तेमाल करने लगे हैं। आम धारणा है कि ये प्राकृतिक विकल्प हैं, इसलिए चीनी की तुलना में शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद होंगे। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है?

अगर आप भी चाय, दूध या दूसरी चीजों में चीनी की जगह गुड़ या शहद का इस्तेमाल करते हैं, तो इस अंतर को समझना जरूरी है। कैंसर सर्जन डॉ. जयेश शर्मा ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में इसी सवाल का जवाब देते हुए बताया कि गुड़ और शहद को चीनी का बहुत बेहतर या कम नुकसान वाला विकल्प मानना पूरी तरह सही नहीं है।

गुड़ और शहद को लेकर क्यों है भ्रम?
चीनी को लेकर लोगों के बीच लंबे समय से यह धारणा रही है कि यह सिर्फ कैलोरी देती है और इसका अधिक सेवन वजन बढ़ने तथा कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इसी वजह से कई लोग सफेद चीनी से दूरी बनाकर गुड़ या शहद को अपनी डाइट में शामिल करते हैं। गुड़ को प्राकृतिक मिठास का स्रोत माना जाता है, जबकि शहद को भी चीनी से बेहतर विकल्प समझा जाता है। खासकर चाय पीने वाले लोग अक्सर एक चम्मच चीनी की जगह गुड़ या शहद डालना शुरू कर देते हैं। उन्हें लगता है कि इससे मिठास भी मिल जाएगी और चीनी के नुकसान से भी बचा जा सकेगा। लेकिन एक्सपर्ट की बताई जानकारी के मुताबिक, तस्वीर इतनी सीधी नहीं है। गुड़, शहद और चीनी तीनों में मुख्य रूप से शुगर ही होती है और इनका अधिक सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

See also  इस राज्य में अब कैंसर से जंग के लिए 18 साल के ऊपर के लोगों की जांच होगी अनिवार्य

क्या गुड़ चीनी से ज्यादा फायदेमंद है?
गुड़ को अक्सर सफेद चीनी का हेल्दी विकल्प बताया जाता है। इसका एक कारण यह है कि चीनी की तुलना में गुड़ कम प्रोसेस्ड होता है। गुड़ में आयरन और कुछ अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व बेहद कम मात्रा में पाए जा सकते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि गुड़ को पोषण का बड़ा स्रोत मान लिया जाए। गुड़ में मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा इतनी अधिक नहीं होती कि सामान्य मात्रा में इसे खाने से शरीर की पोषण संबंधी जरूरतें पूरी हो जाएं। इसके अलावा गुड़ भी मुख्य रूप से शुगर और कैलोरी का स्रोत है। इसलिए अगर कोई व्यक्ति वजन कम करने, ब्लड शुगर नियंत्रित रखने या अतिरिक्त चीनी कम करने के उद्देश्य से चीनी की जगह बड़ी मात्रा में गुड़ खाना शुरू कर देता है, तो अपेक्षित फायदा नहीं मिल सकता।

क्या शहद चीनी से बेहतर है?
शहद को लेकर भी लोगों के बीच ऐसी ही धारणा है। चूंकि शहद प्राकृतिक स्रोत से प्राप्त होता है, इसलिए इसे अक्सर रिफाइंड चीनी से बेहतर माना जाता है। शहद में कुछ एंटीऑक्सीडेंट और अन्य यौगिक पाए जाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि शहद को असीमित मात्रा में लिया जा सकता है। शहद में भी शुगर और कैलोरी होती है। इसलिए इसका ज्यादा सेवन शरीर में अतिरिक्त कैलोरी और शुगर की मात्रा बढ़ा सकता है। खासतौर पर अगर शहद को चाय या अन्य पेय पदार्थों में केवल अतिरिक्त मिठास के लिए डाला जा रहा है, तो इसे हेल्दी फूड समझकर अधिक मात्रा में लेना उचित नहीं माना जा सकता।

See also  सुबह के वक्त क्या आपको भी आती है बार-बार छींक, जानें क्या हैं इसके कारण

चाय में गुड़ या शहद डालने से क्या फायदा?
चाय में सफेद चीनी की जगह गुड़ या शहद डालने से कई लोगों को लगता है कि उन्होंने एक हेल्दी बदलाव कर लिया है। लेकिन अगर उद्देश्य केवल अतिरिक्त शुगर कम करना है, तो सबसे महत्वपूर्ण बात मिठास के स्रोत से ज्यादा उसकी मात्रा है। यानी एक व्यक्ति चाय में चीनी की जगह उतनी ही मात्रा में गुड़ या शहद इस्तेमाल करता है, तो सिर्फ विकल्प बदलने से अतिरिक्त शुगर का सेवन खत्म नहीं हो जाता। शरीर को मिलने वाली कुल शुगर और कैलोरी पर ध्यान देना जरूरी है। इसीलिए चाय में गुड़ या शहद डालने को किसी तरह का जादुई हेल्थ हैक समझना सही नहीं होगा। अगर किसी व्यक्ति को मीठी चाय पसंद है, तो धीरे-धीरे मिठास की मात्रा कम करना ज्यादा व्यावहारिक तरीका हो सकता है।

रोज कितनी चीनी लेना ठीक है?
चीनी की जरूरत और मात्रा व्यक्ति की कुल डाइट, उम्र, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। विशेषज्ञों की सामान्य सलाह यही रहती है कि अतिरिक्त शुगर का सेवन सीमित रखा जाए। दिनभर की कुल कैलोरी का 10 प्रतिशत से कम हिस्सा चीनी से आने की बात कही गई है। उन्होंने यह भी बताया कि रोजाना सीमित मात्रा में चीनी का सेवन और त्योहारों या समारोहों में होने वाले अत्यधिक मीठे सेवन के बीच बड़ा अंतर है। त्योहार, पार्टी या शादी जैसे मौकों पर मिठाई, मीठे पेय, डेजर्ट और अन्य खाद्य पदार्थों के जरिए व्यक्ति को अनुमान से कहीं ज्यादा अतिरिक्त शुगर मिल सकती है। इसलिए सिर्फ चाय में इस्तेमाल होने वाली चीनी को कम करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे दिन के खान-पान पर ध्यान देना जरूरी है।

See also  पेट में गैस और भारीपन को न करें इग्नोर, ये 5 खतरनाक बीमारियों का हो सकता है शुरुआती इशारा!

क्या गुड़ आयरन की कमी पूरी कर सकता है?
गुड़ में आयरन मौजूद होने की बात अक्सर कही जाती है। हालांकि, केवल आयरन प्राप्त करने के लिए गुड़ पर निर्भर रहना उचित नहीं है। गुड़ में मौजूद आयरन की मात्रा सीमित होती है और जरूरत के मुताबिक आयरन पाने के लिए संतुलित आहार ज्यादा महत्वपूर्ण है। अगर किसी व्यक्ति में आयरन की कमी पाई गई है, तो केवल गुड़ खाना उसका पर्याप्त उपचार नहीं माना जा सकता। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह के अनुसार डाइट और जरूरत पड़ने पर उपचार लेना जरूरी होता है।

फिर चीनी, गुड़ या शहद में क्या चुनें?
अगर सवाल केवल स्वाद का है, तो व्यक्ति अपनी पसंद के अनुसार चीनी, गुड़ या शहद में से किसी का इस्तेमाल कर सकता है। लेकिन तीनों को जरूरत से ज्यादा लेना उचित नहीं है। सेहत के नजरिए से सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि व्यक्ति अपनी कुल अतिरिक्त शुगर की मात्रा पर नियंत्रण रखे। गुड़ या शहद को इसलिए अधिक मात्रा में लेना कि वे प्राकृतिक हैं, सही रणनीति नहीं है। कुल मिलाकर, सफेद चीनी को गुड़ या शहद से बदलना अपने आप में कोई बड़ा स्वास्थ्य समाधान नहीं है। यदि लक्ष्य वजन नियंत्रित करना, अतिरिक्त कैलोरी कम करना या शुगर का सेवन घटाना है, तो मिठास की कुल मात्रा कम करना ज्यादा अहम है।

Disclaimer: यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी व्यक्ति की बीमारी का निदान या उपचार नहीं है। अपनी डाइट में बड़ा बदलाव करने, वजन घटाने की योजना शुरू करने या किसी स्वास्थ्य समस्या के उपचार के लिए डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

नवीन कुमार साहू को पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 5 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से Bachelor of Science (Electronic Media) और Master of Science (Electronic Media) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें छत्तीसगढ़, राष्ट्रीय समाचार, राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन का अनुभव है। वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार एवं लेख तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक और उपयोगी जानकारी सरल भाषा में पहुंचाना है।