क्यों मनाया जाता है, World Pulses Day? जाने कारण और उद्देश्य
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टीआरपी डेस्क। विश्व भर में हर साल 10 फरवरी को “अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस” (World Pulses Day) के रूप में मनाया जाता है। दाल पोषण और खाद्य सुरक्षा के लिए कितनी आवश्यक हैं, यह बताने और दुनिया में दालों के महत्व को समझाने के लिए वर्ष 2016 को अंतर्राष्ट्रीय दालों का वर्ष घोषित किया गया था। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 फरवरी को विश्व दाल दिवस के रूप में मनाने के लिए प्रस्ताव पारित किया था। तब इस दिन को “अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस” के रूप में मनाया जाता है।

2021 का ‘अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस’ थीम है-”एक सतत भविष्य के लिए पौष्टिक बीज।”

क्यों मनाया जाता है,”अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस”?

दाल हमेशा से भारतीय खानपान का बहुत ही जरूरी हिस्सा रही है। इसमें काफी मात्रा में पोषक तत्व और प्रोटीन मौजूद होते है। दाल वसा में कम और फाइबर से भरपूर होती हैं। जो कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर दोनों के लेवल को कंट्रोल में रखती हैं।

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आज के भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी में फास्ट फूड के प्रचलन से हमारे भोजन में दालों का प्रयोग कम होता जा रहा है। जिसके कारण शरीर को पूरा पोषण नहीं मिल पा रहा है। इसका दुष्प्रभाव लोगों, विशेषकर बच्चों और युवा वर्ग के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इसलिए दालों को खाने में शामिल करने के लिए और स्वास्थ सुरक्षा के लिए दालें कितनी आवश्यक हैं, लोगों में यह जागरूकता लाने के उद्देश्य से इस “अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस” (World Pulses Day) को मनाया जाता है।

क्या होता है, दलहन (Pulses)?

दलहन उस अनाज को कहते हैं, जिससे दाल बनती है यानी दाल पैदा करने वाली फसल को दलहन कहा जाता है। हमारे भारत में कई प्रकार की दालें प्रयोग की जाती है। जो वनस्पति जगत में प्रोटीन का मुख्य स्रोत होती है। चना, मसूर, राजमा, मटर, कुलथी, मूँग और उड़द, सूखी फलियां, अरहर और अन्य प्रकार की दालें दलहन के अंतर्गत आती है। दलहन को फलियां भी कहा जाता है। दालें हमारे भोजन का सबसे महत्वपूर्ण भाग होती है।

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दुनियाभर के दालों का काफी मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है। दलहन न सिर्फ बीज मात्र हैं बल्कि यह न्यूट्रिशन का खजाना भी है। दलहनी फसलों में वह फसलें शामिल नहीं हैं, जिनके हरे पौधे जैसे हरी मटर, हरी फलियां काट लिए जाते हैं। इसके अलावा जिन फसलों को मुख्य रूप से तेल के उत्पादन में प्रयोग किया जाता है, उन्हें दलहन की कैटेगरी में रखा जाता है। इनकी विशेषता यह होती है कि आंच पर पकने के बाद भी उनके पौष्टिक तत्व सुरक्षित रहती है। इनमें बहुत अधिक मात्रा में प्रोटीन और विटामिन्स पाए जाते है।

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