छत्तीसगढ़ के दूसरे छोर से भी सैकड़ों आदिवासी पहुंचे राजधानी, हसदेव अरण्य को बचाने की चला रहे हैं मुहिम

रायपुर। प्रदेश में अलग-अलग मांगों को लेकर दो अलग-अलग स्थानों से निकली आदिवासियों की पदयात्रा एक ही दिन राजधानी पहुंची। बस्तर से आये पदयात्रियों की मुलाकात राज्यपाल से हो गयी और वे ख़ुशी-ख़ुशी वापस भी लौट गए, मगर हसदेव अरण्य को बचाने की मुहिम को लेकर कोरबा-सरगुजा के पदयात्री राज्यपाल से नहीं मिल सके। राज्यपाल ने इन्हें मिलने के लिए कल दोपहर का समय दिया है।

हसदेव अरण्य को बचाने के लिए सरगुजा और कोरबा के सैकड़ों आदिवासी 300 किलोमीटर पैदल चलकर आज रायपुर पहुंच गए। यहां उन्हें राज्यपाल अनुसूईया उइके और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात करनी थी, लेकिन ऐसा संभ हो नही हो सका। मुख्यमंत्री सचिवालय ने पदयात्रियों के प्रतिनिधिमंडल को CM से मिलने का समय नहीं दिया। वहीं राज्यपाल के यहां बातचीत का कम समय उपलब्ध था तो राज्यपाल ने खुद ही बात कर गुरुवार का समय तय कर दिया है।

आंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष किया प्रदर्शन

पदयात्री राजधानी में प्रवेश के बाद फाफाडीह, जेल रोड होते हुए कलेक्ट्रेट के पास स्थित डॉ. भीमराव आम्बेडकर की प्रतिमा तक पहुंचे। यहां प्रतिमा पर माल्यार्पण किया, फिर देर तक नारेबाजी और प्रदर्शन करते रहे। जब पता चला कि राजयपाल और मुख्यमंत्री से आज मुलाकात नहीं हो रही तब सभी लोग पैदल ही टिकरापारा के साहू भवन के लिए रवाना हो गए।
छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक मंडल सदस्य आलोक शुक्ला ने इस बात पर नाराजगी जताई कि पत्राचार के बावजूद उन्हें सीएम से मिलने का समय नहीं दिया गया।

कांग्रेस सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप

हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष उर्मेश्वर सिंह आर्मो ने बताया की साल 2015 में राहुल गांधी मदनपुर आए थे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सामने ही उन्होंने हम लोगों से कहा था, आप इस क्षेत्र को बचाने का संघर्ष कर रहे हैं तो हम आपके साथ खड़े हैं। उसके बाद छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनी। बावजूद इसके उस वादे पर अमल नहीं किया जा रहा है। अडानी के पक्ष में फर्जी ग्रामसभा करके कोल ब्लॉक की स्वीकृति दी जा रही है।

कोयला खनन रोकने और लेमरु हाथी रिजर्व बनाने की मांग

पदयात्रियों है कि हसदेव अरण्य क्षेत्र की समस्त कोयला खनन परियोजना निरस्त की जाये, बिना ग्रामसभा की सहमति के हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोल बेयरिंग एक्ट के तहत किए गए भूमि अधिग्रहण को तत्काल निरस्त किया जाए। अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून का पालन कराया जाए साथ ही लेमरू हाथी रिजर्व को मूर्त रूप दिया जाये। बूढ़ा तालाब में कल धरना देंगे ग्रामीण

मुख्यमंत्री और राज्यपाल से मुलाकात नहीं होने से ग्रामीणों ने अपना कार्यक्रम बदला है। हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति अब गुरुवार सुबह बूढ़ा तालाब स्थित धरना स्थल पर पहुंचेगी। वहां प्रदर्शन कर वह राजधानी के लोगों तक अपना मुद्दा पहुंचाने की कोशिश करेगी। दोपहर में सभी राजभवन आएंगे। यहां 20 लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल अनुसूईया उइके से चर्चा करने जाएगा। समिति के लोग मुख्यमंत्री से मुलाकात का भी समय लेने की कोशिश कर रहे हैं