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क्या ट्रंप और डेमोक्रेट्स आएंगे साथ? हार स्वीकारने के बाद बोले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति- निकालेंगे कोई न कोई रास्ता

US Midterm Election 2026
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
खास बातें (Key Highlights)
  • US Midterm Elections results: पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के पिछड़ते ही हार स्वीकार कर ली है।
  • ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट किया है।
  • उन्होंने लिखा कि, वे इस बार बैले पर नहीं थे।
  • अगर वे खुद बैलेट पर होते तो रिपब्लिकन पार्टी बहुत बड़ी जीत दर्ज करती।

US Midterm Elections results: पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के पिछड़ते ही हार स्वीकार कर ली है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा कि, वे इस बार बैले पर नहीं थे। अगर वे खुद बैलेट पर होते तो रिपब्लिकन पार्टी बहुत बड़ी जीत दर्ज करती।

इससे पहले न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वह मिडटर्म चुनावों के नतीजों को स्वीकार करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि, वे डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हैं और शायद दोनों दल मिलकर कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेंगे।

भारतीय मूल के सुहास सुब्रमण्यम और पिया डांडिया की शानदार जीत

इन चुनावों में भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों का प्रदर्शन बेहतरीन रहा। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार और पूर्व नीतिगत सलाहकार रह चुके सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया से फिर चुनाव जीत लिया है। दूसरी ओर, भारतीय मूल की पिया डांडिया ने फ्लोरिडा में जीत दर्ज कर इतिहास रचा है। हाई-स्कूल की पूर्व प्रधानाचार्य पिया डांडिया ने पूर्व नौसैनिक केसी असकार को हरा दिया। इस जीत के साथ ही पिया डांडिया अमेरिकी कांग्रेस की सबसे नई भारतीय मूल की सदस्य बन गई हैं।

अमेरिकियों ने किन प्रमुख मुद्दों पर दिया वोट?

चुनाव नतीजों और वोटिंग ट्रेंड्स को लेकर अमेरिकी नागरिकों ने अपनी राय साझा की। अमेरिका के नागरिकों ने इस बार हेल्थ सर्विसेस, मेडिसिन की बढ़ती कीमतें और बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखते हुए वोट किया है। इसके अलावा अमेरिकी नागरिकों ने ट्रंप प्रशासन की कड़ी नीतियों को बड़ा मुद्दा बताया। अमेरिका के
कड़े नियमों के कारण छात्र स्कूल और काम पर जाने से डरने लगे थे। इतनी ही नहीं उनके एक छात्र को महज 48 घंटे के भीतर मेक्सिको डिपोर्ट कर दिया गया था। परिजनों को हिरासत में लेने के अलावा देश से निकाले जाने का डर भी नागरिकों में भी था। ग्रोसरी और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों ने भी आम मतदाताओं को प्रभावित किया।

Deeksha Mishra
लेखक / पत्रकार:

Deeksha Mishra

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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