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Bilaspur: FMG डॉक्टरों को हाई कोर्ट से तगड़ा झटका- 1 लाख फीस भी गई, पुराना स्टाइपेंड भी नहीं मिलेगा, क्या है मामला ?

CG HIGH COURT
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
खास बातें (Key Highlights)
  • Major Setback for FMG Doctors: विदेश से MBBS करके लौटे डॉक्टरों की उम्मीदों पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पानी फेर दिया है।
  • तीनों याचिकाएं एक साथ खारिज कर दी गईं।
  • विदेश से डिग्री लेकर आए इन डॉक्टरों को सिम्स में इंटर्नशिप के लिए 1-1 लाख रुपये जमा करने पड़े थे।
  • बाद में NMC ने 4 मार्च 2022 को नया सर्कुलर जारी किया।

Major Setback for FMG Doctors: विदेश से MBBS करके लौटे डॉक्टरों की उम्मीदों पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पानी फेर दिया है। सिम्स बिलासपुर में इंटर्नशिप करने वाले इन डॉक्टरों ने 1 लाख रुपये फीस वापसी और पुराने स्टाइपेंड के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन कोर्ट ने साफ कह दिया – पुराने नियमों से नया फायदा नहीं मिलेगा। तीनों याचिकाएं एक साथ खारिज कर दी गईं।

दरअसल, कहानी 2015 से शुरू होती है। विदेश से डिग्री लेकर आए इन डॉक्टरों को सिम्स में इंटर्नशिप के लिए 1-1 लाख रुपये जमा करने पड़े थे। तब नियम यही था।

बाद में NMC ने 4 मार्च 2022 को नया सर्कुलर जारी किया। कहा गया कि 18 नवंबर 2021 से पहले डिग्री लेने वालों से फीस नहीं ली जाएगी, और उन्हें भी भारतीय कॉलेज के छात्रों जैसा ही स्टाइपेंड मिलेगा। इस पर 5 अगस्त 2022 को संचालनालय ने आदेश भी निकाल दिया। अगस्त 2022 से स्टाइपेंड तो मिलने लगा, लेकिन डॉक्टरों ने सोचा – पुरानी फीस भी वापस मिले और शुरुआती दिनों का स्टाइपेंड भी। बस यहीं से मामला कोर्ट पहुंचा।

याचिका लगाने वालों में डॉ. श्यामू कुमार जांगड़े समेत 14 डॉक्टर, डॉ. छत्रेश चौधरी और डॉ. प्रणव पांडेय शामिल थे। इनकी ओर से अधिवक्ता विकास श्रीवास्तव ने पैरवी की, तो सरकार की ओर से आकांक्षा वर्मा ने मोर्चा संभाला।

कोर्ट ने क्यों कहा – NO?

जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की बेंच ने दो टूक कहा – आप सबने 18 नवंबर 2021 से पहले डिग्री ली है, तो बाद के नियमों का फायदा आपको पीछे से नहीं मिलेगा।

सरकार ने भी यही दलील दी कि 24 नवंबर 2022 की बैठक में पहले ही तय हो चुका है कि 4 मार्च 2022 के सर्कुलर से पहले ली गई फीस वापस नहीं होगी।

स्टाइपेंड वाले दावे पर भी कोर्ट ने कहा – अगस्त 2022 से पहले के भुगतान के लिए आपके पास कोई ठोस आदेश या नियम ही नहीं है। ऐसे में दावा कैसे माना जाए? और इसी के साथ तीनों याचिकाएं खारिज हो गईं। मतलब साफ है – नए नियम का लाभ आगे से मिलेगा, पीछे से वसूली गई फीस वापस नहीं होगी।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. हाई कोर्ट ने FMG डॉक्टरों की मांग क्यों खारिज की?
A. कोर्ट ने कहा कि सभी याचिकाकर्ताओं ने 18 नवंबर 2021 से पहले विदेशी डिग्री हासिल की थी। इसलिए बाद में लागू हुए FMGL Regulations के आधार पर वे पहले जमा फीस की वापसी और पिछली अवधि के स्टाइपेंड के हकदार नहीं हैं।

Q2. डॉक्टरों ने क्या मांग की थी?
A. डॉक्टरों ने सिम्स में इंटर्नशिप के लिए जमा की गई 1 लाख रुपये की फीस वापस करने और इंटर्नशिप रजिस्ट्रेशन की तारीख से भारतीय मेडिकल छात्रों के बराबर स्टाइपेंड देने की मांग की थी। उन्हें अगस्त 2022 से स्टाइपेंड मिल रहा था, लेकिन उससे पहले की अवधि का भुगतान नहीं मिला था।

Q3. राज्य सरकार का क्या तर्क था?
A. सरकार ने कहा कि फीस वर्ष 2015 में ही जमा हुई थी और 24 नवंबर 2022 की बैठक में तय हुआ था कि 4 मार्च 2022 के NMC सर्कुलर से पहले वसूली गई फीस वापस नहीं होगी। बाद के नियमों से पुरानी वसूली पर दावा नहीं बनता।

Shami Imam
लेखक / पत्रकार:

Shami Imam

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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