नई दिल्ली। भारत ने अपनी स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 5 नवंबर को ओडिशा तट के पास डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से प्रलय बैलिस्टिक मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया।
सुबह करीब 11:10 बजे किए गए इस परीक्षण में मिसाइल ने निर्धारित सभी लक्ष्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस कामयाबी के बाद प्रलय मिसाइल को भारतीय सेना में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा है।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, परीक्षण के दौरान विभिन्न रेंज उपकरणों से मिले आंकड़ों के आधार पर मिसाइल के प्रदर्शन की पुष्टि की गई। यह परीक्षण यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल यानी उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण का हिस्सा था। इस दौरान DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और सेना के अधिकारियों की मौजूदगी रही।
राजनाथ सिंह ने DRDO को दी बधाई
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रलय मिसाइल के सफल परीक्षण पर DRDO और इससे जुड़े वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए बताया कि 5 नवंबर को सुबह 11:10 बजे ओडिशा तट के पास स्वदेशी रूप से विकसित प्रलय मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया गया।
रक्षा मंत्री के मुताबिक, यह परीक्षण यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल के तहत किया गया। विभिन्न रेंज उपकरणों से प्राप्त आंकड़ों ने पुष्टि की कि मिसाइल ने अपने सभी निर्धारित लक्ष्यों को पूरा किया। राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि को भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।
DRDO ने स्वदेशी तकनीक से तैयार की प्रलय मिसाइल
प्रलय मिसाइल को DRDO ने देश में विकसित किया है। इसके निर्माण में हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) ने DRDO की अन्य प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर अहम भूमिका निभाई है। इसके अलावा भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) ने भी मिसाइल के विकास में योगदान दिया है।
इस परियोजना की खास बात यह है कि इसमें स्वदेशी तकनीक और देश में विकसित रक्षा प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया है। इससे भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलता है।
प्रलय मिसाइल की खासियत
प्रलय एक स्वदेशी, ठोस ईंधन से संचालित होने वाली सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है। इसे सामरिक जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल, जिसमें Solid Fuel का प्रयोग होता है।
प्रलय मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 150 से 500 किलोमीटर जिसका वजन 500 से 1,000 किलोग्राम तक। यह स्वदेशी रूप से विकसित रक्षा तकनीक है।
प्रलय की एक अहम विशेषता इसकी उड़ान के दौरान दिशा बदलने की क्षमता है। इसे पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में अलग परिचालन विशेषताएं प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
2021 में हुआ था पहला सफल परीक्षण
DRDO ने दिसंबर 2021 में पहली बार प्रलय मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। इसके बाद इसकी क्षमताओं और प्रदर्शन का आकलन करने के लिए समय-समय पर कई परीक्षण किए गए।
जुलाई 2025 में भी ओडिशा तट के पास एक साथ कई मिसाइलों का परीक्षण किया गया था। इस दौरान इसकी अलग-अलग परिचालन क्षमताओं का मूल्यांकन किया गया।
अब 5 नवंबर 2026 को हुआ सफल परीक्षण इसके विकास और उपयोगकर्ता मूल्यांकन प्रक्रिया में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना दोनों प्रलय मिसाइल को अपनी रक्षा क्षमताओं में शामिल करने की योजना पर काम कर रही हैं।



