टीआरपी डेस्क। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने एक बार फिर भारत के खिलाफ तीखे तेवर दिखाए हैं, जिसमें उन्होंने नई दिल्ली पर युद्ध की तैयारी करने और पानी को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया है। जरदारी ने सोमवार को अपने संबोधन में सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) पर भारत के कड़े रुख को ‘हाइड्रो-टेररिज्म’ करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचने की कोशिश की है।

आसिफ अली जरदारी ने दावा किया कि भारतीय नेतृत्व लगातार एक और युद्ध की पृष्ठभूमि तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी नेता हमेशा क्षेत्र में शांति के पक्षधर रहे हैं, इसलिए वे भारत को युद्ध की सलाह नहीं देंगे। जरदारी ने भारत को संदेश देते हुए कहा कि जंग के मैदान से हटकर ‘मतलब वाली बातचीत’ (Meaningful Dialogue) की मेज पर आना ही दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए एकमात्र रास्ता है। हालांकि, एक तरफ शांति की बात करते हुए दूसरी तरफ उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के तथाकथित राजनयिक और नैतिक समर्थन को जारी रखने की बात दोहराई। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक कश्मीर मुद्दा हल नहीं होता, तब तक दक्षिण एशिया में स्थायी शांति संभव नहीं है।

सिंधु जल संधि को लेकर जरदारी की बौखलाहट साफ नजर आई। भारत द्वारा संधि के प्रावधानों पर रोक लगाने या समीक्षा करने के संकेतों को उन्होंने ‘हाइड्रो-टेररिज्म’ का नाम दिया। जरदारी का आरोप है कि भारत अपने राजनीतिक लाभ के लिए पानी के बहाव को नियंत्रित कर उसे एक युद्धक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही गंभीर आर्थिक और जल संकट से जूझ रहा है।

अपने संबोधन में जरदारी ने केवल भारत ही नहीं, बल्कि अफगानिस्तान की स्थिति पर भी चर्चा की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि अफगानिस्तान में आतंकी समूहों की मौजूदगी पूरी दुनिया के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि यदि इस खतरे को नजरअंदाज किया गया, तो कोई भी देश बड़े हमले का शिकार हो सकता है। दिलचस्प बात यह है कि जरदारी ने पाकिस्तान को ‘पवित्र धरती’ बताते हुए दावा किया कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी पड़ोसी देश के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं होने देंगे, जबकि भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर आतंकवाद को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है।

जरदारी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने सीमा पार से होने वाली आतंकी गतिविधियों और सैन्य तनाव को कम करने के लिए हमेशा कूटनीतिक रास्तों का चुनाव किया है। उनके अनुसार, पाकिस्तान की संप्रभुता सर्वोपरि है और वे किसी भी विदेशी ताकत को अपनी शांति भंग करने की अनुमति नहीं देंगे।

राष्ट्रपति जरदारी का यह बयान सोमवार को जारी हुआ, जिसमें उन्होंने सिंधु जल संधि को लेकर भारत पर हाइड्रो-टेररिज्म का आरोप लगाया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के जरिए अफगानिस्तान में बढ़ते आतंकी खतरों की ओर भी इशारा किया। पाकिस्तान वर्तमान में एफएटीएफ (FATF) और अन्य वैश्विक मंचों पर अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रहा है, लेकिन कश्मीर और जल विवाद पर उसके पुराने रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।