टीआरपी डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रोजगार एक प्रमुख मुद्दा बनकर उभर रहा है। अमेरिकी नागरिकों को उम्मीद है कि नई सरकार महंगाई और बढ़ती बेरोजगारी पर अंकुश लगाएगी। हालांकि, चुनाव से पहले कई रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि विदेशी मूल के लोगों के कारण अमेरिकी नागरिकों को नौकरियों में मुश्किलें हो रही हैं।

अमेरिकी नागरिकों के लिए नौकरियों की कमी: रिपोर्ट

कुछ ट्रंप समर्थक अर्थशास्त्रियों और MAGA मीडिया ने श्रम सांख्यिकी ब्यूरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि विदेशी मूल के लोग अमेरिका में अधिकतर नौकरियों पर कब्जा जमा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष लगभग 8 लाख अमेरिकी नागरिकों ने अपनी नौकरियां खो दीं, जबकि विदेशी निवासियों ने 10 लाख से अधिक नौकरियां हासिल कीं।

रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी श्रम बाजार में विदेशी श्रमिकों और सरकारी नौकरशाहों की भरमार है। कई कंपनियां और संस्थाएं अमेरिकी नागरिकों के बजाय विदेशी मूल के कर्मचारियों को प्राथमिकता देती हैं। कोरोना महामारी के बाद भी नौकरी के बाजार में अमेरिकी नागरिकों के लिए अवसर सीमित ही रहे हैं।

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अवैध प्रवासियों का बढ़ता असर: रिपोर्ट

ब्रेइटबार्ट की रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में अवैध प्रवासी अमेरिका में प्रवेश कर रहे हैं और स्थानीय अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छीन रहे हैं। प्यू रिसर्च सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक, 2022 तक 3 करोड़ से अधिक अवैध प्रवासी और विदेशी अमेरिकी नौकरियों पर काबिज हो चुके हैं।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।