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US Voter List SIR Controversy: हार के डर से ट्रंप बने ज्ञानेश? जानिए अमेरिकी एसआईआर में कैसे कटे इतने लाख भारतीयों के नाम

US Voter List SIR Controversy: अमेरिका में वोटर लिस्ट की जांच को लेकर विवाद के बीच करीब 2 लाख भारतवंशी मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा किया गया है। न्यूयॉर्क से भास्कर संवाददाता मोहम्मद अली की रिपोर्ट के मुताबिक, ये नाम उन 26 राज्यों की वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, जहां रिपब्लिकन पार्टी […]

US Voter List SIR Indian Voters
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

US Voter List SIR Controversy: अमेरिका में वोटर लिस्ट की जांच को लेकर विवाद के बीच करीब 2 लाख भारतवंशी मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा किया गया है। न्यूयॉर्क से भास्कर संवाददाता मोहम्मद अली की रिपोर्ट के मुताबिक, ये नाम उन 26 राज्यों की वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, जहां रिपब्लिकन पार्टी की सरकार है। रिपोर्ट में इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की वोटर लिस्ट जांच मुहिम से जोड़कर देखा गया है। यह मामला भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रही बहस की याद भी दिलाता है।

हालांकि, अमेरिका और भारत की चुनाव व्यवस्था अलग है। दोनों देशों में मतदाता सूची की जांच और नाम हटाने की प्रक्रिया एक जैसी नहीं है। लेकिन दोनों मामलों में मतदाताओं के लिए अहम सवाल यही है कि सूची में नाम सही तरीके से दर्ज हो, किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से न हटे और नाम हटाए जाने पर उसे अपनी बात रखने का मौका मिले।

अमेरिका में 2 लाख भारतवंशी वोटरों के नाम कटने का दावा

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में करीब 21 लाख भारतवंशी वोटरों में से लगभग 2 लाख के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। दावा है कि नाम हटाने की कार्रवाई रिपब्लिकन पार्टी के शासन वाले 26 राज्यों में हुई है। इस कार्यवाही को 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले की राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़ा गया है। इसमें कहा गया है कि भारतीय मूल के मतदाताओं का रुझान परंपरागत रूप से डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में करीब 65 फीसदी भारतीय मूल के मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस को वोट दिया था। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि वोटर लिस्ट की जांच के दौरान भारतीय मूल के लोगों के अलावा हिस्पैनिक और अश्वेत मतदाताओं के नाम भी हटाए जा रहे हैं। हालांकि, दिए गए विवरण में हटाए गए नामों की आधिकारिक राज्यवार सूची या स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

ट्रम्प की सेव अमेरिका मुहिम क्या है?

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में वोटर लिस्ट की जांच के लिए सेव अमेरिका अभियान चलाया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि इस अभियान को अभी संसद की मंजूरी नहीं मिली है। अमेरिका में चुनावों का संचालन भारत की तरह एक ही केंद्रीय चुनाव आयोग के जरिए नहीं होता। वहां राज्यों की चुनाव व्यवस्था और नियमों की अहम भूमिका है। इसी वजह से मतदाता पंजीकरण, पहचान की जांच और वोट डालने की प्रक्रिया राज्य के हिसाब से अलग हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में वोटर आईडी के लिए पूरे देश में एक जैसी व्यवस्था नहीं है। कुछ राज्यों में ड्राइविंग लाइसेंस या दूसरे पहचान पत्रों के आधार पर मतदान किया जा सकता है। हालांकि, मतदान के लिए संबंधित राज्य की पात्रता और पंजीकरण संबंधी शर्तें पूरी करना जरूरी होता है।

भारत के SIR से क्या है तुलना?

भारत में SIR यानी Special Intensive Revision का मकसद मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण करना है। इस प्रक्रिया में मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन किया जाता है और सूची को अपडेट किया जाता है। चुनाव आयोग की ओर से अलग-अलग चरणों में इस प्रक्रिया को लागू किया गया है। SIR को लेकर भारत में भी यह सवाल उठता रहा है कि जांच के दौरान किसी पात्र मतदाता का नाम छूटने या हटने की स्थिति में उसे कैसे बहाल कराया जाए। चुनाव आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल पर मतदाता सूची में नाम खोजने, नोटिस के जवाब में दस्तावेज जमा करने और संबंधित आवेदन या अपील की स्थिति जानने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अमेरिका के मामले से तुलना करते समय यह फर्क समझना जरूरी है कि दोनों देशों की कानूनी व्यवस्था, चुनाव संचालन और मतदाता पंजीकरण के नियम अलग हैं। इसलिए अमेरिका में नाम हटने के दावे को भारत के SIR के बराबर नहीं माना जा सकता। दोनों मामलों में साझा मुद्दा मतदाता सूची की विश्वसनीयता और पात्र मतदाताओं के मतदान के अधिकार की सुरक्षा है।

नाम कटने का नोटिस मिलने पर क्यों बढ़ी चिंता?

रिपोर्ट में कैनसस सिटी में रहने वाले गुरबीर सिंह का उदाहरण दिया गया है। उनके मुताबिक, वह 20 साल पहले अमेरिका आए थे और कुछ दिन पहले उन्हें मतदाता सूची से नाम हटने का नोटिस मिला। गुरबीर सिंह ने रिपोर्ट में कहा कि वह नोटिस का जवाब देकर बेवजह जांच एजेंसियों के रडार पर नहीं आना चाहते। उनका कहना है कि वोट नहीं देने से शायद ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन अगर जांच के दौरान नागरिकता से जुड़ा कोई मसला खड़ा हो गया तो अमेरिका में रहना मुश्किल हो सकता है। इसी आशंका के चलते वह जोखिम नहीं लेना चाहते। यह उनका व्यक्तिगत अनुभव और आशंका है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि नोटिस का जवाब देने वाले सभी लोगों की नागरिकता पर खतरा होगा।

मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प के लिए क्या दांव पर है?

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच होते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस चुनाव में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों और सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर मतदान होना है। रिपोर्ट में अमेरिका में करीब 16 करोड़ मतदाताओं का भी उल्लेख है। अगर राष्ट्रपति की पार्टी को संसद में बहुमत नहीं मिलता, तो उसके लिए कानून पास कराना और नीतिगत फैसलों को आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, मिडटर्म चुनाव में हारने से राष्ट्रपति का पद अपने आप खत्म नहीं होता। रिपोर्ट में ट्रम्प की पार्टी को चुनाव में नुकसान की आशंका और वोटर लिस्ट जांच के बीच संबंध बताया गया है। लेकिन नाम हटाने की कार्रवाई का उद्देश्य राजनीतिक लाभ लेना है या नहीं, इसे साबित करने के लिए आधिकारिक आंकड़ों और स्वतंत्र जांच की जरूरत होगी।

वोटर लिस्ट में नाम न हो तो क्या करें?

भारत में SIR या किसी अन्य पुनरीक्षण के दौरान मतदाता को अपना नाम सूची में जांचना चाहिए। अगर नाम नहीं मिलता या कोई नोटिस आता है, तो संबंधित चुनाव कार्यालय से जानकारी लेकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत दस्तावेज जमा किए जा सकते हैं। आवेदन या अपील के विकल्प भी उपलब्ध हैं। अमेरिका में प्रक्रिया संबंधित राज्य के नियमों पर निर्भर करती है। वहां मतदाता को अपने राज्य के चुनाव कार्यालय से पंजीकरण की स्थिति और नाम हटाए जाने के कारण की जानकारी लेनी चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक, नाम हटाए जाने को अदालत में चुनौती दी जा सकती है, हालांकि कानूनी प्रक्रिया में समय लग सकता है। दोनों देशों के मामले एक बात की अहमियत दिखाते हैं, मतदाता सूची की जांच पारदर्शी हो, नाम हटाने का कारण स्पष्ट हो और पात्र मतदाता को सुधार या अपील का उचित अवसर मिले।

Deeksha Mishra
लेखक / पत्रकार:

Deeksha Mishra

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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