Major fraud regarding promotions: पदोन्नति में टीईटी और बीएड की अनिवार्यता के बीच कोरबा जिले से एक बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ शिक्षकों ने सेवा में रहते हुए विभागीय अनुमति के बिना नियमित B.Ed. की डिग्री हासिल की और उसी के आधार पर पदोन्नति की प्रक्रिया में लाभ लेने की कोशिश की।

छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष और कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन जिला कोरबा के महासचिव ओमप्रकाश बघेल ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

क्या है पूरा मामला

बघेल ने संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर द्वारा जारी कार्योत्तर अनुमति आदेश के निरस्त होने और B.Ed. अंकसूची का हवाला देते हुए कहा है कि आधा दर्जन शिक्षकों के प्रकरण संदेह के घेरे में हैं।

आरोप है कि इन शिक्षकों ने पहले B.Ed. कर ली, बाद में यह कोर्स करने की कार्योत्तर अनुमति के लिए DEO कार्यालय में आवेदन दिया। जिसके आधार पर जेडी कार्यालय बिलासपुर से अनुमति आदेश जारी हुए, लेकिन 24 घंटे के भीतर ही इस आदेश को निरस्त कर दिया गया। बघेल ने कहा कि अनुमति यदि नियम सम्मत नहीं थी तो दस्तावेजों और आवेदन की सत्यता की जांच जरूरी है। 

उपस्थिति और परीक्षा रिकॉर्ड के मिलान की मांग

बघेल ने मांग की है कि संबंधित शिक्षकों की B.Ed. डिग्री और अंकसूची का मिलान संबंधित विश्वविद्यालय से कराया जाए। साथ ही सेवा अवधि की उपस्थिति पंजी, अवकाश अभिलेख और वेतन आहरण विवरण की जांच की जाए। इसके अलावा विभागीय अनुमति के दस्तावेज और विश्वविद्यालय की परीक्षा समय-सारणी तथा उपस्थिति रिकॉर्ड का भी मिलान किया जाए।

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ताकि पता चल सके कि शिक्षक सेवा में उपस्थित थे या नियमित बीएड की पढ़ाई और परीक्षा दे रहे थे।

बघेल ने कहा कि जांच में कूटरचना, गलत जानकारी या विभाग को गुमराह करने की पुष्टि होने पर नियमानुसार विभागीय और वैधानिक कार्रवाई होनी चाहिए।

नौकरी में रहते कोर्स करने के क्या हैं नियम?

सरकारी सेवा में रहने के दौरान अगर कोई कोर्स करना हो तो विभाग से इसकी अनुमति लेनी पड़ती है। अगर नियमित कोर्स है तो संबंधित को उसकी पढ़ाई के लिए छुट्टी लेनी पड़ती है। ताजा मामले में जिन शिक्षकों ने बीएड की डिग्री जमा की है उस कोर्स के लिए उन्होंने विभागीय अनुमति कोर्स करने के बाद मांगी। इस पर संयुक्त संचालक जेडी बिलासपुर ने अनुमति भी दे दी मगर इन शिक्षकों की चालाकी उजागर होने पर अनुमति रद्द कर दी गई।

वरिष्ठता सूची में B.Ed. दर्ज होने पर सवाल

बघेल ने बताया कि कार्योत्तर अनुमति निरस्त होने के बावजूद 01 अप्रैल 2026 की प्राविधिक वरिष्ठता सूची में कुछ शिक्षकों की योग्यता में B.Ed. दर्ज है। उन्होंने सवाल उठाया कि अनुमति निरस्त होने के बाद B.Ed. योग्यता को सूची में किस आधार पर शामिल किया गया।

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क्या मांग की गई है?

ओमप्रकाश बघेल ने मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री, सचिव और संचालक, लोक शिक्षण से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच हो। जांच पूरी होने तक विवादित योग्यता के आधार पर पदोन्नति लाभ न दिया जाए, गलत जानकारी के आधार पर नाम शामिल करने वालों की जिम्मेदारी तय हो। प्रक्रिया में पक्षपात और भाई-भतीजावाद की संभावना खत्म कर दस्तावेज सार्वजनिक जांच में लाए जाएं।

उन्होंने कहा कि पदोन्नति कर्मचारियों का अधिकार है और यह पूरी तरह नियमसम्मत और समान अवसर पर आधारित होनी चाहिए।

यूनीवर्सिटी की डिग्री पर भी संदेह

शिकायतकर्ता ने संबंधित शिक्षकों द्वारा जमा बालाघाट की सरदार पटेल की डिग्री पर भी संदेह जताया है। उन्होंने बताया कि बीएड की डिग्री में नियमित पढ़ाई का उल्लेख है, जबकि संबंधित शिक्षक उसी दौरान नियमित तौर पर अपनी ड्यूटी कर रहे थे। वैसे भी यह कोर्स दो साल का होता है और इसे नियमित तौर पर ही करने का प्रावधान है। ऐसे में इस यूनिवर्सिटी और उसकी डिग्री पर पूरी तरह संदेह है।

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बता दें कि जिस तरह का फर्जीवाड़ा कोरबा के शिक्षा विभाग में उजागर हुआ है, वैसा ही पूरे प्रदेश में होने की आशंका जताई जा रही है। वर्तमान में टीईटी की अनिवार्यता का नियम लागू होने के बाद शिक्षक इसी तरह की जुगत लगा रहे हैं ताकि उन्हें पदोन्नति मिल सके। बहरहाल देखना है कि इस मामले की जांच कब तक पूरी होती है और विभाग द्वारा क्या कार्यवाही की जाती है।

FAQ: पदोन्नति के लिए फर्जीवाड़ा

सवाल: कोरबा में क्या मामला सामने आया है?

कुछ शिक्षकों पर बिना विभागीय अनुमति नियमित B.Ed. करने और उसी के आधार पर पदोन्नति लाभ लेने का आरोप है।

सवाल: कार्योत्तर अनुमति क्या है और उसका क्या हुआ?

बाद में ली गई अनुमति। बिलासपुर से जारी होने के 24 घंटे बाद उसे निरस्त कर दिया गया।

सवाल: ओमप्रकाश बघेल ने क्या मांग की?

विश्वविद्यालय और विभागीय रिकॉर्ड का मिलान कर निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग।

सवाल: वरिष्ठता सूची में क्या गड़बड़ी बताई गई?

अनुमति निरस्त होने के बाद भी 01 अप्रैल 2026 की सूची में कुछ शिक्षकों की योग्यता में B.Ed. दर्ज है।