Chhattisgarh Angakar Roti: भारत के हर राज्य की अपनी एक अनोखी खाने की पहचान है। जैसे पंजाब अपनी मक्की की रोटी के लिए जाना जाता है, वैसे ही छत्तीसगढ़ की अंगाकर रोटी अपने स्वादिष्ट स्वाद के लिए काफी मशहूर है। हालांकि, आधुनिक खानपान के इस दौर में लोग पारंपरिक व्यंजनों को भूलते जा रहे हैं। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों की यह खास डिश अब फिर से चर्चा में आ गई है।

अंगाकर रोटी नाम छत्तीसगढ़ी शब्द अंगरा यानी जलते हुए कोयले या गोबर के उपले से आया है। इसे बनाने का तरीका बहुत ही पारंपरिक और प्राकृतिक है। यही कारण है कि इसका स्वाद बेहद अलग और सोंधा होता है। आइए जानते हैं कि इस खास रेसिपी को घर पर कैसे तैयार किया जा सकता है।

क्या है अंगाकर रोटी का इतिहास


अंगाकर रोटी छत्तीसगढ़ की एक बहुत ही पॉपुलर और पारंपरिक डिश है। यह मुख्य रूप से बचे हुए चावल और चावल के आटे से बनाई जाती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे सामान्य तवे पर नहीं पकाया जाता है। इसके बजाय इसे सीधे गोबर के उपलों या कोयले की आग पर पकाया जाता है, जिसे लोकल भाषा में अंगारा कहा जाता है।

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ग्रामीण संस्कृति में भोजन पकाने की यह प्राचीन शैली स्वास्थ्य के लिहाज से भी बहुत बेहतरीन मानी जाती है। इसमें किसी भी तरह के कृत्रिम तेल या मसालों का इस्तेमाल नहीं होता है। यह पचने में बेहद आसान और सेहतमंद होती है।

पलाश के पत्तों में लपेटकर पकाई जाती है यह खास डिश


इस पारंपरिक रोटी को बनाते समय इसे पलाश के पत्तों में लपेटकर भूना जाता है। पलाश के पत्तों में पकाने से इसमें एक अनोखी मिट्टी जैसी खुशबू और बेहतरीन स्वाद आता है। इसके अलावा, इसे अक्सर देसी घी और सिलबट्टे पर पिसी हुई मसालेदार टमाटर-धनिया की चटनी के साथ परोसा जाता है।

यह पर्यटकों के बीच भी काफी लोकप्रिय होती जा रही है। जो भी पर्यटक छत्तीसगढ़ घूमने आते हैं, वे इस अनोखे स्वाद को चखना नहीं भूलते हैं। जो व्यक्ति इसे एक बार खा लेता है, वह हमेशा के लिए इसका दीवाना बन जाता है।

घर पर ऐसे बनाएं पारंपरिक अंगाकर रोटी


इसे बनाने के लिए आपको ज्यादा सामान की जरूरत नहीं पड़ती है। आइए जानते हैं इसकी पूरी सामग्री और आसान विधि।

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जरूरी सामग्री
रोटियां सेंकने के लिए 3 से 4 गोबर के उपले

5 से 7 ताजे पलाश के पत्ते

1 कटोरी पका हुआ चावल

1 कटोरी चावल का आटा

स्वादानुसार नमक

जरूरत के हिसाब से पानी

बनाने की विधि
इस रोटी को बनाने के लिए सबसे पहले बचे हुए पके हुए चावल को अच्छी तरह मैश किया जाता है। इसके बाद उसमें जरूरत के हिसाब से चावल का आटा, नमक और गर्म पानी डालकर नरम आटा गूंथा जाता है।

तैयार होने के बाद पलाश के पत्तों को धोकर फैला दिया जाता है। इस आटे को हाथ से गोल आकार देकर पत्तों के ऊपर फैलाया जाता है, और फिर उसे ऊपर से और पत्तों से ढक दिया जाता है। आखिर में इसे जलते हुए गोबर के उपलों या कोयले की आग के बीच रखकर दोनों तरफ से अच्छी तरह से पकाया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल


Q1. अंगाकर रोटी मुख्य रूप से किस राज्य की प्रसिद्ध डिश है?
अंगाकर रोटी छत्तीसगढ़ राज्य की एक बेहद प्रसिद्ध और पारंपरिक डिश है।

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Q2. इस रोटी को पकाने के लिए किस चीज का इस्तेमाल किया जाता है?
इसे सामान्य तवे पर पकाने के बजाय जलते हुए गोबर के उपलों या कोयले की आग पर पकाया जाता है।

Q3. अंगाकर रोटी को किस चीज में लपेटकर पकाया जाता है?
इसे पारंपरिक रूप से ताजे पलाश के पत्तों में लपेटकर पकाया जाता है, जिससे इसमें अनोखी खुशबू आती है।

Q4. इस डिश को बनाने के लिए मुख्य सामग्री क्या है?
इसे मुख्य रूप से बचे हुए पके हुए चावल और चावल के आटे से तैयार किया जाता है।

Q5. अंगाकर रोटी को किसके साथ परोसा जाता है?
इसे आमतौर पर शुद्ध देसी घी और सिलबट्टे पर पिसी हुई टमाटर-धनिया की चटनी के साथ परोसा जाता है।

रजनी सेन टीआरपी में लाइफस्टाइल से जुड़ी खबरें लिखती हैं। उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी, खान-पान, फैशन, त्योहार, संस्कृति, ज्योतिष और बदलते लाइफस्टाइल ट्रेंड्स से जुड़े विषयों पर लिखने का अनुभव है। उनका लेखन सरल, सहज और पाठकों से जुड़ा हुआ है। रजनी सेन ने बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की पढ़ाई की है और पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी लेखन क्षमता के जरिए पाठकों तक उपयोगी और रोचक जानकारी पहुंचाने का प्रयास करती हैं।