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Chhattisgarh Teeja festival traditions: क्यों खास है छत्तीसगढ़ का ‘तीजा’? जानिए मायके लौटने की परंपरा और निर्जला व्रत से जुड़ी अनकही बातें

Clay idols of Shiva and Parvati worshipped during the Teeja festival in Chhattisgarh.
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

Chhattisgarh Teeja festival traditions: छत्तीसगढ़ में हरितालिका तीज को आम बोलचाल में ‘तीजा’ कहा जाता है। यह सिर्फ व्रत और पूजा का त्योहार नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा और परिवार से गहराई से जुड़ा पर्व है।

तीजा पर विवाहित महिलाएं मायके आती हैं और शिव-पार्वती की पूजा कर सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। कई परिवारों में बेटी के मायके आने और उसे तीजा के लिए ले जाने की परंपरा आज भी निभाई जाती है।

छत्तीसगढ़ में तीजा की क्या परंपरा है?

छत्तीसगढ़ में तीजा का सबसे खास पक्ष मायके से जुड़ा है। शादी के बाद महिलाएं तीजा मनाने के लिए अपने मायके आती हैं। परिवार में बेटी के आने को लेकर खास उत्साह रहता है।

लोक परंपरा में भाई या परिवार के सदस्य बहन-बेटी को मायके लाने की जिम्मेदारी निभाते हैं। बेटी के लिए कपड़े, श्रृंगार का सामान और पूजा से जुड़ी चीजें भी भेजी जाती हैं। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में इन परंपराओं का तरीका अलग हो सकता है। तीजा महिलाओं के लिए अपने मायके, माता-पिता, भाई-बहनों और बचपन की यादों से जुड़ने का भी अवसर है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ में इस त्योहार का भावनात्मक महत्व काफी ज्यादा माना जाता है।

मायके क्यों आती हैं महिलाएं?

तीजा पर मायके आने की परंपरा छत्तीसगढ़ी संस्कृति का अहम हिस्सा है। विवाह के बाद बेटियां अपने ससुराल में रहती हैं। ऐसे में तीजा उन्हें कुछ समय के लिए मायके लौटने और परिवार के साथ त्योहार मनाने का अवसर देता है। कई घरों में बेटी को तीजा के लिए विशेष रूप से बुलाया जाता है। भाई या परिवार के सदस्य उसे लेने जाते हैं। इस दौरान घर में बेटी के स्वागत की तैयारी होती है। इसी परंपरा के कारण तीजा को केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मायके और बेटी के रिश्ते से जुड़ा त्योहार भी माना जाता है।

तीजा पर कैसे रखा जाता है व्रत?

हरितालिका तीज पर महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं। कई महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं। निर्जला व्रत में भोजन के साथ पानी भी नहीं लिया जाता। हालांकि, व्रत रखने का तरीका परिवार और व्यक्तिगत धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है। अविवाहित लड़कियां भी हरितालिका तीज का व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यता में इसे मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से जोड़ा जाता है।

शिव-पार्वती की पूजा क्यों होती है?

हरितालिका तीज की धार्मिक कथा माता पार्वती और भगवान शिव से जुड़ी है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी मान्यता के आधार पर तीज पर शिव-पार्वती की पूजा की जाती है। महिलाएं माता पार्वती से अपने वैवाहिक जीवन में सुख और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।

तीजा में क्या होता है खास?

छत्तीसगढ़ी तीजा में पूजा के साथ लोक संस्कृति की भी झलक दिखाई देती है। महिलाएं पारंपरिक तरीके से तैयार होती हैं। परिवार के लोग मिलकर त्योहार मनाते हैं। मायके आई बेटियां अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ समय बिताती हैं। कई जगहों पर तीजा से जुड़े पारंपरिक गीत और लोक रीति-रिवाज भी देखने को मिलते हैं। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ में तीजा धार्मिक आस्था के साथ-साथ लोक जीवन और पारिवारिक रिश्तों का त्योहार भी बन गया है।

तीजा और हरितालिका तीज में क्या अंतर है?

धार्मिक रूप से इसे हरितालिका तीज कहा जाता है। छत्तीसगढ़ में इसे आम तौर पर ‘तीजा’ या ‘तीजा पोरा’ की परंपरा से जोड़ा जाता है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में नाम और स्थानीय रीति-रिवाजों में अंतर हो सकता है। हरितालिका तीज का मुख्य धार्मिक आधार शिव-पार्वती की पूजा और व्रत है। वहीं छत्तीसगढ़ी तीजा में मायके आने, बेटी के स्वागत और पारिवारिक मेल-मिलाप की परंपरा इसे स्थानीय रंग देती है।

क्यों खास है छत्तीसगढ़ की तीजा?

छत्तीसगढ़ की तीजा को समझने के लिए सिर्फ इसके धार्मिक पक्ष को देखना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ बेटी, मायके और परिवार के रिश्तों की भावनाएं भी जुड़ी हैं। विवाह के बाद मायके लौटने का मौका महिलाओं के लिए इस त्योहार को खास बनाता है। एक तरफ शिव-पार्वती की पूजा और व्रत होता है, तो दूसरी तरफ परिवार के साथ मिलकर त्योहार मनाने की खुशी होती है।

5 FAQs (प्रश्न और उत्तर):

प्रश्न: छत्तीसगढ़ में हरितालिका तीज को किस नाम से जाना जाता है?

उत्तर: छत्तीसगढ़ में हरितालिका तीज को आम बोलचाल में ‘तीजा’ या ‘तीजा पोरा’ की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है।

प्रश्न: तीजा पर महिलाओं के मायके जाने की क्या परंपरा है?

उत्तर: तीजा पर विवाहित महिलाएं अपने मायके आती हैं। परिवार के सदस्य या भाई उन्हें लेने ससुराल जाते हैं और उनके लिए कपड़े, श्रृंगार सामग्री व पूजा का सामान भेजा जाता है।

प्रश्न: तीजा का व्रत किस धार्मिक मान्यता पर आधारित है?

उत्तर: यह व्रत माता पार्वती द्वारा भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए की गई कठोर तपस्या की कथा पर आधारित है।

प्रश्न: क्या तीजा का व्रत अविवाहित लड़कियां भी रख सकती हैं?

उत्तर: हां, धार्मिक मान्यता के अनुसार अविवाहित लड़कियां मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से तीजा का व्रत रखती हैं।

प्रश्न: तीजा पर व्रत रखने का क्या नियम है?

उत्तर: कई महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत (बिना अन्न और पानी) रखती हैं, हालांकि व्रत रखने का तरीका परिवार और व्यक्तिगत परंपरा के अनुसार अलग भी हो सकता है।

Deeksha Mishra
लेखक / पत्रकार:

Deeksha Mishra

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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