Ancient Sri Krishna Kubja Mandir structure on Mathura Parikrama Marg during Janmashtami

Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर मथुरा-वृंदावन के मंदिरों में खास रौनक रहती है। कृष्ण मंदिरों में आमतौर पर कान्हा के साथ राधारानी के दर्शन होते हैं। लेकिन मथुरा में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां भगवान श्रीकृष्ण के साथ राधा नहीं, बल्कि उनकी परम भक्त कुब्जा विराजमान हैं।

मथुरा के परिक्रमा मार्ग पर स्थित इस मंदिर को करीब 500 साल पुराना बताया जाता है। मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां दर्शन और मंदिर के जल से स्नान करने से त्वचा से जुड़ी परेशानियां दूर होती हैं।

कृष्ण के साथ कुब्जा की मूर्ति क्यों?

इस अनोखे मंदिर के पीछे कुब्जा से जुड़ी पौराणिक कथा बताई जाती है। मान्यता के अनुसार, कुब्जा मथुरा के राजा कंस की दासी थीं। शारीरिक बनावट की वजह से उनकी कमर झुकी हुई थी। उनके रूप को लेकर लोग उनका मजाक उड़ाते थे। समाज के तानों के कारण कुब्जा को काफी कष्ट झेलना पड़ता था। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण जब मथुरा पहुंचे, तब रास्ते में उनकी नजर कुब्जा पर पड़ी। श्रीकृष्ण ने उन्हें बार-बार सुंदरी कहकर पुकारा। कुब्जा को लगा कि शायद कान्हा भी उनका मजाक उड़ा रहे हैं। इससे वह आहत होकर रोने लगीं।

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कान्हा के स्पर्श से बदल गई कुब्जा की काया

पौराणिक कथा के अनुसार, कुब्जा की आंखों में आंसू देखकर श्रीकृष्ण ने उनकी मदद की। उन्होंने कुब्जा के पैर के ऊपर अपना पैर रखा और हाथों से उनका चेहरा ऊपर उठाया। मान्यता है कि इसके बाद उनकी झुकी हुई कमर सीधी हो गई और उनका रूप बदल गया। कहा जाता है कि भगवान के स्पर्श से कुब्जा का कष्ट दूर हो गया और वह सुंदर युवती में बदल गईं। इस घटना के बाद वह भगवान श्रीकृष्ण की परम भक्तों में शामिल हो गईं।

त्वचा संबंधी परेशानियों को लेकर क्या है मान्यता?

मथुरा के इस मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं में अलग आस्था है। मान्यता है कि यहां भगवान श्रीकृष्ण और कुब्जा के दर्शन करने से त्वचा से जुड़ी परेशानियां दूर हो सकती हैं। मंदिर के जल से स्नान करने और सच्चे मन से हाजिरी लगाने को लेकर भी ऐसी मान्यता है। इसी विश्वास के चलते लोग दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं। श्रद्धालु स्वास्थ्य और सौंदर्य का आशीर्वाद पाने की कामना के साथ मंदिर में दर्शन करते हैं।

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परिक्रमा मार्ग पर स्थित है मंदिर

यह मंदिर उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित है। बताया जाता है कि करीब 500 साल पुराना यह मंदिर मथुरा के प्रसिद्ध परिक्रमा मार्ग पर है। मथुरा पहुंचने के बाद परिक्रमा मार्ग जाकर भगवान श्रीकृष्ण और उनकी भक्त कुब्जा के दर्शन किए जा सकते हैं। जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा-वृंदावन में कृष्ण भक्ति का अलग रंग देखने को मिलता है। इसी बीच कुब्जा मंदिर अपनी अलग मान्यता और कृष्ण से जुड़ी पौराणिक कथा के कारण श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

रजनी सेन टीआरपी में लाइफस्टाइल से जुड़ी खबरें लिखती हैं। उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी, खान-पान, फैशन, त्योहार, संस्कृति, ज्योतिष और बदलते लाइफस्टाइल ट्रेंड्स से जुड़े विषयों पर लिखने का अनुभव है। उनका लेखन सरल, सहज और पाठकों से जुड़ा हुआ है। रजनी सेन ने बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की पढ़ाई की है और पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी लेखन क्षमता के जरिए पाठकों तक उपयोगी और रोचक जानकारी पहुंचाने का प्रयास करती हैं।