Gardening Tips: सितंबर का महीना किचन गार्डन के लिए बेहद खास माना जाता है। गर्मियों में उगाई जाने वाली कई सब्जियों का दौर अब खत्म होने लगता है और पौधे धीरे-धीरे फल देना कम कर देते हैं। ऐसे में गार्डन में खाली जगह दिखाई देने लगती है। लेकिन इस खाली जगह को यूं ही छोड़ने की जरूरत नहीं है। सितंबर का बदलता मौसम सर्दियों में मिलने वाली कई सब्जियों की बुवाई के लिए बेहतर समय होता है।
सितंबर में तापमान धीरे-धीरे नीचे आने लगता है और तेज गर्मी का असर कम होने लगता है। यही वजह है कि पालक, मूली, मटर, लेट्यूस और कई अन्य ठंड पसंद करने वाली सब्जियां इस दौरान अच्छी तरह विकसित हो सकती हैं। अगर सही समय पर बीज बो दिए जाएं और मिट्टी, पानी व धूप का ध्यान रखा जाए तो आने वाले महीनों में घर से ही ताजी सब्जियां मिल सकती हैं।
पालक
सितंबर में पालक की बुवाई करना किचन गार्डन के लिए अच्छा विकल्प है। पालक तेजी से बढ़ने वाली सब्जियों में शामिल है और अनुकूल मौसम मिलने पर इसकी कोमल पत्तियां अपेक्षाकृत कम समय में तोड़ने लायक हो जाती हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि जरूरत के अनुसार पत्तियां तोड़ी जा सकती हैं, जिससे पौधे से लंबे समय तक उत्पादन मिलता रहता है। पालक को जमीन के साथ-साथ गमले, ग्रो बैग या छोटे कंटेनर में भी उगाया जा सकता है। इसके लिए मिट्टी में पर्याप्त जैविक खाद मिलाना और नियमित लेकिन नियंत्रित सिंचाई करना उपयोगी रहता है।
लहसुन
लहसुन उन फसलों में शामिल है जिन्हें तैयार होने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है। सितंबर में इसकी कलियां लगाने से पौधे को ठंड शुरू होने से पहले जड़ें विकसित करने का पर्याप्त समय मिल सकता है। सर्दियों में इसकी बढ़त कुछ धीमी हो सकती है, लेकिन मौसम अनुकूल होने पर पौधा फिर तेजी से विकसित होता है। लहसुन के लिए ऐसी मिट्टी बेहतर रहती है जिसमें पानी लंबे समय तक जमा न रहे। पौधे को पर्याप्त धूप भी मिलनी चाहिए। अगर आप इस फसल को लगाते हैं तो जल्दी परिणाम की उम्मीद करने के बजाय कुछ महीनों का इंतजार करना जरूरी है।
मूली
सितंबर में मूली की बुवाई उन लोगों के लिए खास तौर पर फायदेमंद हो सकती है जो कम समय में अपने गार्डन से सब्जी लेना चाहते हैं। सही तापमान और अच्छी मिट्टी मिलने पर मूली तेजी से विकसित होती है और अपेक्षाकृत कम समय में इस्तेमाल के लिए तैयार हो सकती है। मूली के पौधों को ज्यादा जगह की जरूरत नहीं होती। इसलिए गर्मियों की फसल हटने के बाद बची छोटी-छोटी जगहों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। मिट्टी को बहुत ज्यादा गीला रखने के बजाय हल्की नमी बनाए रखना बेहतर रहता है।
केल
केल ठंडे मौसम में अच्छी तरह बढ़ने वाली पत्तेदार सब्जियों में गिनी जाती है। सितंबर में इसकी बुवाई करने पर पौधे को आने वाले ठंडे मौसम में विकसित होने का पर्याप्त समय मिल सकता है। कई परिस्थितियों में तापमान कम होने के साथ इसकी पत्तियों का स्वाद भी बेहतर माना जाता है। केल को ऐसी जगह लगाना चाहिए जहां उसे पर्याप्त रोशनी मिले। नियमित देखभाल और जरूरत के अनुसार पानी देने से पौधे को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है।
लेट्यूस
अगर आपके खाने में सलाद की अहमियत है तो सितंबर में लेट्यूस उगाने पर विचार किया जा सकता है। लेट्यूस को तेज गर्मी की तुलना में अपेक्षाकृत ठंडा मौसम ज्यादा अनुकूल लगता है। इसलिए सितंबर में इसकी बुवाई करके आने वाले ठंडे मौसम का फायदा उठाया जा सकता है। लेट्यूस के बीजों को एक ही दिन में पूरा बोने के बजाय कुछ अंतराल पर बोना उपयोगी हो सकता है। इससे पूरी फसल एक साथ तैयार होने के बजाय अलग-अलग समय पर नई पत्तियां मिल सकती हैं।
बाकला यानी फावा बीन्स
बाकला, जिसे फावा बीन्स भी कहा जाता है, सितंबर में लगाए जाने वाले विकल्पों में शामिल किया जा सकता है। इस समय लगाए गए पौधों को ठंड आने से पहले अपनी जड़ें मजबूत करने का अवसर मिलता है। मौसम गर्म होने की ओर बढ़ने पर इनका विकास फिर तेज हो सकता है। बाकला उगाते समय जल निकासी का विशेष ध्यान रखना चाहिए। ऐसी मिट्टी जहां पानी लगातार जमा रहता हो, वहां पौधे की बढ़त प्रभावित हो सकती है। गार्डन में पर्याप्त रोशनी और हवा वाली जगह चुनना भी फायदेमंद रहेगा।
मटर
मटर को ठंडा मौसम काफी पसंद होता है और सितंबर का बदलता मौसम इसकी शुरुआती तैयारी के लिए उपयोगी हो सकता है। खासतौर पर जल्दी तैयार होने वाली किस्मों की बुवाई करके आने वाले मौसम में ताजी हरी मटर का आनंद लिया जा सकता है। मटर की बेल को सहारे की जरूरत पड़ सकती है, इसलिए बीज बोते समय ही पौधे के लिए सपोर्ट की व्यवस्था करना बेहतर रहता है। गार्डन में पर्याप्त धूप, उचित सिंचाई और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी इसके विकास में मदद कर सकती है।
सितंबर में गार्डन खाली न छोड़ें
गर्मियों की सब्जियों का मौसम खत्म होना किचन गार्डन के लिए विराम नहीं है। सितंबर वास्तव में अगली फसल की शुरुआत करने का समय है। पालक और मूली जैसी जल्दी मिलने वाली सब्जियों के साथ लहसुन, मटर, बाकला, केल और लेट्यूस जैसी फसलों की तैयारी करके आप आने वाले महीनों के लिए गार्डन को उत्पादक बना सकते हैं। हालांकि, बुवाई का सही समय आपके स्थानीय तापमान, मिट्टी और मौसम पर निर्भर करता है। बीज के पैकेट पर दिए गए निर्देशों और स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा। थोड़ी सी नियमित देखभाल से गार्डन की खाली जगह आने वाले मौसम में ताजी और घर में उगाई गई सब्जियों का स्रोत बन सकती है।


