A road scene featuring a zebra crossing with bold white striped pedestrian markings

Zebra Crossing: हम रोज सड़क पार करते समय सफेद चौड़ी पट्टियों का इस्तेमाल करते हैं, जिन्हें जेब्रा क्रॉसिंग कहा जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसका नाम एक अफ्रीकी जानवर जेब्रा पर क्यों रखा गया। इसकी वजह किसी वैज्ञानिक या तकनीकी शब्द से नहीं, बल्कि आम लोगों की सोच से जुड़ी है। बाद में यही नाम आधिकारिक बन गया।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन की सड़कों पर मोटर वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। बढ़ते ट्रैफिक के बीच पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रास्ते की जरूरत महसूस हुई। साथ ही ऐसा निशान भी चाहिए था जिसे वाहन चालक दूर से आसानी से पहचान सकें।

आम जनता ने रखा था यह अनोखा नाम
काफी टेस्टिंग के बाद अधिकारियों ने गहरे रंग की सड़क पर चौड़ी सफेद पट्टियों का डिजाइन फाइनल किया।शुरुआत में इसे कोई तकनीकी नाम नहीं दिया गया था। लोगों ने जब सड़क पर यह डिजाइन देखा, तो इसकी तुलना जेब्रा के शरीर पर बनी धारियों से कर दी। यह उपनाम जनता के बीच बहुत पॉपुलर हो गया। साल 1951 में यूके में लागू होने के बाद सरकार ने भी इसका आधिकारिक नाम ‘जेब्रा क्रॉसिंग’ रख दिया।

See also  ब्रेकिंग: ये खबर ध्यान से बढ़े, जानें लॉकडाउन पर अमित शाह क्या बोले- कांग्रेस कर रही है ओछी राजनीति, इसे और सख्त करने की जरूरत

क्यों दुनियाभर में मशहूर हुआ यह डिजाइन?
यह साधारण सा डिजाइन एक बड़ी सफलता साबित हुआ। इसके पीछे मुख्य कारण थे।

दूर से दिखने वाला पैटर्न
काले और सफेद रंग के कड़े कंट्रास्ट से विज़ुअल पैटर्न बना, जिसे चालक दूर से पहचान लेते थे। बनाने में आसान और सस्ता: इस डिजाइन को किसी भी सड़क पर पेंट करना बेहद आसान और कम खर्चीला था।

ब्रिटेन में सफलता के बाद अन्य देशों ने भी अपने रोड नेटवर्क को आधुनिक बनाते हुए इसे अपनाया। आज यह दुनिया भर में पैदल यात्रियों की सुरक्षा का अंतरराष्ट्रीय प्रतीक है।

क्या है बेलिशा बीकन का इतिहास?
यूनाइटेड किंगडम में पारंपरिक जेब्रा क्रॉसिंग के किनारों पर काले-सफेद खंभे लगे होते हैं। इनके ऊपर चमकने वाली पीली लाइटें होती हैं, जिन्हें ‘बेलिशा बीकन’ कहा जाता है।

इनका नाम ब्रिटेन के तत्कालीन ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर लेस्ली होरे-बेलिशा के नाम पर रखा गया था। उन्होंने सड़क सुरक्षा से जुड़े कई अहम सुधार किए थे। इन लाइटों का मुख्य काम रात या खराब मौसम में क्रॉसिंग को दूर से विजिबल बनाना है। आज कई देश बिना इन लाइटों के सिर्फ सफेद पट्टियों वाले डिजाइन का इस्तेमाल करते हैं।

See also  युवाओं और बच्चों में तेजी से बढ़ रहा फैटी लिवर, गलत खानपान बना बड़ी वजह

5 FAQs
Q1: जेब्रा क्रॉसिंग का नाम जेब्रा के नाम पर क्यों रखा गया?
A1: साल 1951 में जब ब्रिटेन में सड़क पर चौड़ी सफेद पट्टियों का डिजाइन लागू किया गया, तो आम लोगों ने इसकी तुलना जेब्रा के शरीर की धारियों से की। यह उपनाम इतना लोकप्रिय हुआ कि सरकार ने इसका नाम आधिकारिक तौर पर ‘जेब्रा क्रॉसिंग’ रख दिया।

Q2: जेब्रा क्रॉसिंग की शुरुआत कब और कहां हुई थी?
A2: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन में गाड़ियों की संख्या बढ़ने पर पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए इस डिजाइन का परीक्षण किया गया और साल 1951 में इसे पूरे यूनाइटेड किंगडम में लागू किया गया।

Q3: बेलिशा बीकन क्या होता है?
A3: यूके में पारंपरिक जेब्रा क्रॉसिंग के किनारों पर लगे खंभों के ऊपर चमकने वाली पीली लाइटों को ‘बेलिशा बीकन’ कहा जाता है, जो रात या खराब मौसम में क्रॉसिंग को दूर से विजिबल बनाती हैं।

Q4: बेलिशा बीकन का नाम किसके नाम पर रखा गया था?
A4: इनका नाम ब्रिटेन के तत्कालीन ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर लेस्ली होरे-बेलिशा के नाम पर रखा गया था।

See also  कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए 31 मार्च तक सभी तकनीकी शिक्षण संस्थान भी रहेंगे बंद

Q5: जेब्रा क्रॉसिंग डिजाइन पूरी दुनिया में क्यों मशहूर हुआ?
A5: यह काले और सफेद रंग के कड़े कंट्रास्ट की वजह से दूर से दिखाई देता था और इसे किसी भी सड़क पर बनाना बेहद आसान और कम खर्चीला था।

रजनी सेन टीआरपी में लाइफस्टाइल से जुड़ी खबरें लिखती हैं। उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी, खान-पान, फैशन, त्योहार, संस्कृति, ज्योतिष और बदलते लाइफस्टाइल ट्रेंड्स से जुड़े विषयों पर लिखने का अनुभव है। उनका लेखन सरल, सहज और पाठकों से जुड़ा हुआ है। रजनी सेन ने बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की पढ़ाई की है और पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी लेखन क्षमता के जरिए पाठकों तक उपयोगी और रोचक जानकारी पहुंचाने का प्रयास करती हैं।