टीआरपी डेस्क। मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने संगठन को मजबूत करने और नेताओं की गुटबाजी पर लगाम लगाने के लिए एक बहुत बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। पार्टी ने अब निगम, मंडल और प्राधिकरणों में नियुक्त होने वाले पदाधिकारियों के लिए नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है। संगठन के इस नए और सख्त कदम का सीधा मकसद जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करना और उन सीटों को जीतना है जहां बीजेपी कमजोर है।

लाल बत्ती का रसूख खत्म: नहीं मिलेगा मंत्री का दर्जा और वीआईपी प्रोटोकॉल

इस बार बीजेपी संगठन ने साफ कर दिया है कि निगम-मंडलों में खाली पड़े पदों पर होने वाली नियुक्तियों में नेताओं को केवल काम की जिम्मेदारी मिलेगी। इन पदाधिकारियों को मिलने वाले पारंपरिक मंत्री पद के दर्जे और वीआईपी प्रोटोकॉल (VIP Protocol) पर फिलहाल पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। अब नेताओं को गाड़ियों पर लाल बत्ती या सरकारी रसूख नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ मैदान में उतरकर काम करने का जिम्मा सौंपा जाएगा।

See also  पूर्व जनसंपर्क अधिकारी राजेश टोप्पो का एक और कारनामा

लागू होगा नो होम टर्फ (No Home Turf) फॉर्मूला

पार्टी ने इस बार आंतरिक कलह को रोकने के लिए एक अनोखा नियम बनाया है। इसके तहत नेताओं को उनके गृह जिले या खुद के विधानसभा क्षेत्र में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। उन्हें पूरी तरह से नए और अलग जिलों में जाकर काम करना होगा।

दरअसल, अक्सर देखा जाता है कि अपने ही इलाके में पद मिलने के बाद स्थानीय नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई और आपसी खींचतान शुरू हो जाती है। नो होम टर्फ फॉर्मूले से इस आंतरिक गुटबाजी को रोकने में बड़ी मदद मिलेगी।

हारी हुई और कमजोर सीटों पर पसीना बहाएंगे नेता

बीजेपी संगठन इन सभी नए पदाधिकारियों को उन विधानसभा क्षेत्रों में भेजेगा जहां पार्टी पिछले चुनावों में हार गई थी। इसके अलावा जहां भी संगठन बेहद कमजोर स्थिति में है, वहां इन नेताओं को तैनात किया जाएगा। संगठन ने साफ संदेश दे दिया है कि पद अब केवल प्रतिष्ठा या आराम के लिए नहीं, बल्कि मैदान में परिणाम देने के लिए दिए जाएंगे।

See also  मध्यप्रदेश के पूर्वी हिस्से में चार दिन तक बारिश के आसार, पश्चिम में बढ़ेगी ठंड, जानिए आज कैसा रहेगा प्रदेश का मौसम