इंदौर। कांग्रेस संगठन में हो रही उपेक्षा और नजरअंदाजी से नाराज़ यादव समाज अब खुलकर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ मोर्चा खोल चुका है। इंदौर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के यादव संगठनों ने साफ कर दिया है कि वे आगामी चुनावों में जीतू पटवारी को हराने के लिए पूरी ताकत से अभियान चलाएंगे।


इंदौर कांग्रेस अध्यक्ष पद पर दीपू यादव की उपेक्षा से नाराज़गी

विवाद की जड़ है इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति, जिसमें यादव समाज के लोकप्रिय और जमीनी नेता दीपू यादव को नजरअंदाज कर किसी और को अध्यक्ष बनाया गया। यादव समाज का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति की उपेक्षा नहीं, बल्कि पूरे समाज का अपमान है।


हाईकमान को गुमराह कर की गई नियुक्ति?

समाज के नेताओं ने आरोप लगाया है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दिल्ली जाकर हाईकमान को गुमराह किया और अपने मन मुताबिक नियुक्तियां करवाईं। जबकि स्थानीय स्तर पर अधिकांश नेता दीपू यादव के पक्ष में थे।

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‘चाय पर चर्चा’ में बनेगी चुनावी रणनीति

इस मुद्दे को लेकर आज इंदौर में यादव समाज की बड़ी बैठक बुलाई गई है। बैठक में ‘चाय पर चर्चा’ के बहाने आगे की रणनीति तय की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, पटवारी के खिलाफ पुतला दहन और वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की योजना भी बनाई जा रही है।


क्यों भड़का यादव समाज?

दीपू यादव, पूर्व मंत्री अरुण यादव के करीबी माने जाते हैं और कांग्रेस के युवा कार्यकर्ताओं में उनकी अच्छी पकड़ है। उनके पिता रामलाल यादव भी विधायक रह चुके हैं, जिससे समाज को लगता है कि राजनीतिक साजिश के तहत उन्हें दरकिनार किया गया।


विरोध में सैकड़ों कार्यकर्ताओं की लामबंदी

सुभाष यादव, कलन यादव, नरेश यादव, बब्बू यादव, सौरभ यादव, बबला यादव, सोनू यादव, अंकित यादव, जितू यादव, बाबू यादव, पप्पू यादव, दीपक यादव, राम यादव सहित हजारों कार्यकर्ता खुलकर विरोध में आ चुके हैं।

यह पहला मौका नहीं है जब दीपू यादव को कांग्रेस में नजरअंदाज किया गया हो। इससे पहले भी उनकी दावेदारी को दरकिनार किया जा चुका है, जिससे समाज में नाराज़गी और गहरा गई है।

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क्या कांग्रेस को नुकसान होगा?

यदि यादव समाज चुनावों में कांग्रेस के खिलाफ जाता है तो इंदौर समेत मध्यप्रदेश के कई सीटों पर इसका सीधा राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस नाराज़गी को कैसे संभालता है।