टीआरपी डेस्क। लगातार आठ सालों से देश के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीतने वाले इंदौर की साख पर दूषित पेयजल का दाग लग गया है। लैब टेस्ट रिपोर्ट से पुष्टि हुई है कि भागीरथपुरा इलाके में पेयजल प्रदूषण ही उल्टी-दस्त की महामारी का मुख्य कारण था। शहर के कुछ हिस्सों में जानलेवा पानी की आपूर्ति हो रही थी।
चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि शहर के एक मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में सामने आया है कि भागीरथपुरा में मुख्य पेयजल पाइपलाइन में लीकेज हुआ था। पुलिस चौकी के पास यह लीकेज शौचालय के निकट होने से सीवरेज का पानी पेयजल में मिल गया, जिससे प्रदूषण फैला।
अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया कि पूरे इलाके की पेयजल पाइपलाइन की विस्तृत जांच की जा रही है ताकि अन्य लीकेज का पता लगाया जा सके। जांच पूरी होने के बाद गुरुवार को घरों में पाइपलाइन से साफ पानी की आपूर्ति शुरू की गई, लेकिन एहतियातन लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई है। नए सैंपल भी जांच के लिए भेजे गए हैं।
सीएम ने भागीरथपुरा का किया दौरा
इस त्रासदी से सबक लेते हुए मध्य प्रदेश में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए पूरे राज्य के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर दुबे ने भागीरथपुरा का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया।
8571 लोगों की गई जांच
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, गुरुवार को 1714 घरों के सर्वे में 8571 लोगों की जांच की गई। इनमें 338 लोगों में उल्टी-दस्त के हल्के लक्षण पाए गए, जिन्हें घर पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। महामारी शुरू होने के आठ दिनों में 272 मरीज अस्पताल में भर्ती हुए, जिनमें से 71 को डिस्चार्ज कर दिया गया। वर्तमान में 201 मरीज भर्ती हैं, जिनमें 32 आईसीयू में हैं।


