टीआरपी डेस्क। पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को नरसिंह द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भगवान विष्णु के सबसे उग्र और शक्तिशाली अवतार, भगवान नरसिंह को समर्पित है। होली के ठीक कुछ दिन पहले आने वाला यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह बुराई पर अच्छाई की जीत के उत्सव यानी होली की पृष्ठभूमि भी तैयार करता है।

28 फरवरी को रखा जाएगा नरसिंह द्वादशी व्रत

साल 2026 में फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि 28 फरवरी को पड़ रही है। इसी दिन भक्त भगवान नरसिंह का व्रत रखेंगे। चूंकि यह तिथि होलिका दहन से कुछ दिन पहले आती है, इसलिए इसे आध्यात्मिक रूप से होली के पर्व की शुरुआत माना जाता है।

भक्त प्रह्लाद और भगवान नरसिंह का अटूट संबंध

नरसिंह द्वादशी की कथा सीधे तौर पर भक्त प्रह्लाद की अटूट श्रद्धा से जुड़ी है। दैत्यराज हिरण्यकश्यप के अत्याचारों से जब प्रह्लाद का जीवन संकट में था, तब भगवान विष्णु ने स्तंभ फाड़कर नरसिंह अवतार लिया था। उन्होंने संध्या के समय, घर की चौखट पर हिरण्यकश्यप का वध कर सृष्टि को आतंक से मुक्त कराया था। यही कारण है कि इस दिन को धर्म की अधर्म पर विजय के रूप में पूजा जाता है।

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होली से पहले ही क्यों आता है यह पर्व?

फाल्गुन माह के क्रम में पहले नरसिंह द्वादशी और फिर होलिका दहन आता है। दरअसल, होली का मूल संदेश ‘सत्य की जीत’ है। नरसिंह द्वादशी उस भक्ति की रक्षा की याद दिलाती है, जिसका अंतिम पड़ाव होलिका दहन में अहंकार के अंत के रूप में दिखता है। भगवान नरसिंह का अवतार यह बताता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी ईश्वर अपने भक्त के साथ होते हैं।

व्रत और पूजा की सरल विधि

प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो पीले) धारण करें।

भगवान नरसिंह और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।

पीले फूल, चंदन, धूप और दीप से विधि-विधान से पूजा करें।

विष्णु सहस्रनाम या नरसिंह स्तोत्र का पाठ करना विशेष फलदायी होता है।

दिनभर सात्विक रहते हुए व्रत करें और शाम को आरती के बाद फलाहार ग्रहण करें।