टीआरपी डेस्क। 12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI 171 उड़ान भरते ही एक मेडिकल हॉस्टल की इमारत पर जा गिरी। दोपहर 1:39 पर टेक ऑफ करने वाली फ्लाइट 2:40 तक क्रैश हो चुकी थी। हादसे में 241 यात्रियों और क्रू मेंबर्स की जान गई। इनमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल थे। एकमात्र जीवित यात्री हैं रमेश कुमार विश्वास।

ब्लैक बॉक्स मिला, शुरुआती रिपोर्ट भी

दुर्घटना के अगले दो दिनों में फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) बरामद कर लिए गए। जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) कर रही है। चूंकि विमान अमेरिकी कंपनी का था, अमेरिकी नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) भी अलग से जांच कर रहा है।

इंजन में खराबी नहीं, तो फिर क्या हुआ?

अब तक की जांच में बोइंग 787 ड्रीमलाइनर और उसके GE Aerospace इंजनों में कोई तकनीकी खराबी नहीं पाई गई है। Wall Street Journal की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लाइट टेक ऑफ के तुरंत बाद दोनों इंजनों के फ्यूल सप्लाई स्विच ऑफ कर दिए गए थे यही थ्रस्ट खत्म होने की वजह बनी।

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ये वही स्विच होते हैं जिन्हें पायलट सामान्यतः इंजन स्टार्ट या इमरजेंसी सिचुएशन में इस्तेमाल करते हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये गलती से दब गए, जानबूझकर ऑफ किए गए, या किसी खराबी की वजह से अपने आप बंद हो गए?

फ्यूल स्विच ऑफ कैसे हुआ?

ब्लैक बॉक्स के डेटा से इतना जरूर साफ है कि दोनों इंजन के फ्यूल स्विच बंद हुए थे। अमेरिका के एविएशन एक्सपर्ट जॉन कॉक्स के मुताबिक, ये स्विच इतने संवेदनशील नहीं होते कि यूं ही छूने से ऑफ हो जाएं। उन्हें ऑन/ऑफ करने के लिए स्पष्ट मूवमेंट चाहिए।

ड्रीमलाइनर में फ्यूल कटऑफ होते ही इंजन को ताकत मिलनी बंद हो जाती है। नतीजा: विमान की बिजली सप्लाई रुक सकती है, कॉकपिट के सिस्टम बंद हो सकते हैं। जांचकर्ता मान रहे हैं कि शायद पायलट ने इमरजेंसी के दौरान फ्यूल स्विच दबाया होगा।

RAT एक्टिव मिला, यानी दोनों इंजन बंद थे

शुरुआती रिपोर्ट में एक और अहम बात सामने आई है कि क्रैश के वक्त एयरक्राफ्ट में रैम एयर टरबाइन (RAT) एक्टिव थी। इसका मतलब ये कि दोनों इंजन पूरी तरह बंद हो चुके थे और विमान आपातकालीन बैकअप पावर पर चल रहा था।

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बोइंग की मानक प्रक्रिया के मुताबिक, डुअल इंजन फेल होने की स्थिति में पायलट को फ्यूल स्विच ऑन/ऑफ कर ईईसी रीसेट करना होता है इसे विंडमिल स्टार्ट कहा जाता है। लेकिन इतनी कम ऊंचाई (650 फीट) पर दोबारा इंजन स्टार्ट कर पाना लगभग नामुमकिन था।

पायलट की ट्रेनिंग और बैकग्राउंड भी जांच के दायरे में

फ्लाइट उड़ा रहे कैप्टन सुमित सभरवाल के पास 8200 घंटे और फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर के पास 1100 घंटे की उड़ान का अनुभव था। बावजूद इसके, दोनों के ट्रेनिंग रिकॉर्ड और निर्णय प्रक्रिया की भी समीक्षा की जा रही है।

क्या कोई साजिश थी?

28 जून को नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा था कि जांच हर एंगल से हो रही है, जिसमें साजिश की आशंका को भी खंगाला जा रहा है। ब्लैक बॉक्स की जांच भारत में ही हो रही है। तीन महीने में विस्तृत रिपोर्ट आने की उम्मीद है।

सभी ड्रीमलाइनर की जांच हुई, खतरा नहीं: सरकार

DGCA के आदेश पर एयर इंडिया के सभी 33 ड्रीमलाइनर की जांच की गई है। मंत्री मोहोल के मुताबिक, सभी विमान सुरक्षित पाए गए हैं। यात्रियों को घबराने की जरूरत नहीं है।

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उस दिन क्या हुआ था?

फ्लाइट ने दोपहर 1:39 पर अहमदाबाद से उड़ान भरी। 650 फीट की ऊंचाई पर ही पायलट ने ATC को ‘Mayday’ सिग्नल दिया। संपर्क टूट गया। विमान एयरपोर्ट से महज 2 किलोमीटर दूर जाकर गिर पड़ा।

270 लोग मारे गए—230 यात्री, 11 क्रू मेंबर और 29 जमीन पर मौजूद लोग। DNA टेस्ट के बाद शवों की पहचान की जा सकी। यात्रियों में 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, 7 पुर्तगाली और 1 कनाडाई नागरिक शामिल थे।

अब क्या?

जांच रिपोर्ट में कई बातें सामने आई हैं, लेकिन कुछ बड़े सवाल अब भी अधूरे हैं।

  • क्या पायलट ने गलती से फ्यूल स्विच बंद किए या यह SOP का हिस्सा था?
  • क्या इंजन फेल हुआ या कोई सॉफ्टवेयर/इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी हुई?
  • अगर विमान में सब कुछ ठीक था, तो इतनी भीषण दुर्घटना क्यों हुई?

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।