नई दिल्ली। देश के जाने-माने उद्योगपति रतन टाटा को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न देने की मांग जोर पकड़ रही है। यह मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। इस मामले में एक याचिका दायर की गई है जिसपर आज सुनवाई होगी । अब तक देश में विभिन्न क्षेत्रों के सम्मानित 48 लोगों को भारत रत्न दिया जा चुका है।

भारत रत्न पाने वालों में पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, गायक भूपेन हजारिका और दिवंगत गायिका लता मंगेशकर भी शामिल हैं। सबसे पहले यह सम्मान पूर्व राष्ट्रपति और शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को 1954 में दिया गया था। अब लोगों का कहना है कि देश में उद्योग के क्षेत्र में बड़ा योगदान देने वाले रतन टाटा को भी इस पुरस्कार से नवाजा जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर भी इसकी मांग उठती रहती है।

मोटिवेशनल स्पीकर विवेक विंद्रा ने इस मांग की शुरुआत की थी। इसके बाद ट्विटर पर लोग इस मांग को लेकर ट्वीट करने लगे । हालांकि एक बार रतन टाटा ने यह भी कहा था कि इससे उनका कोई संबंध नहीं है और वह किसी भी पुरस्कार की इच्छा नहीं रखते हैं। इससे पहले केवल एक उद्योगपति को ही भारत रत्न दिया गया है और वह हैं जेआरडी टाटा। उन्हें 1992 में भारत रत्न दिया गया था। वह 53 साल तक टाटा सन्स के चेयरमैन रहे।

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गौरतलब है कि रतन टाटा के नेतृत्व वाला टाटा सन्स में बहुत सारी कंपनियां हैं। भारत में लिस्टेड कंपनियों में यह सबसे बड़ा प्रमोटर ग्रुप है। रतन टाटा को टाटा ग्रुप के फाउंडर जमशेद जी टाटा ने गोद लिया था। जेआरडी टाटा उनके चाचा थे। जेआरडी टाटा ने 1991 में रतन टाटा को टाटा ग्रुप की कमान सौंप दी थी।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।