टीआरपी डेस्क। Bhupati’s Appeal : छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के जंगलों में लंबे समय तक नक्सल आंदोलन के वरिष्ठ नेता रहे मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति (69) ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपने विचार साझा किए हैं। 5 मिनट के वीडियो संदेश में भूपति ने जंगलों में छुपे अपने साथियों से हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की जोरदार अपील की।

भूपति ने वीडियो में कहा कि असफल सशस्त्र संघर्ष के कारण नक्सली जनता से अलग-थलग पड़ गए हैं और उनका पतन शुरू हो चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब समय बदल गया है और साथियों को शांति से जनता की सेवा में लौटना चाहिए।

आत्मसमर्पण का दिया संदेश

भूपति ने 15 अक्टूबर को गढ़चिरौली में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने 60 नक्सलियों के साथ आत्मसमर्पण किया था। यह उस घटना के बाद उनका पहला सार्वजनिक संदेश है। वीडियो में उन्होंने अपने पूर्व साथियों से कहा कि वे मोबाइल नंबरों के माध्यम से उनसे या अन्य वरिष्ठ आत्मसमर्पित नक्सल नेता सतीश से संपर्क कर सकते हैं ताकि वे आंदोलन छोड़ने और मुख्यधारा में लौटने में मदद कर सकें।

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भूपति ने कहा “हमारा मुख्यधारा में लौटना बदलते परिदृश्य का प्रतीक है। इस सशस्त्र संघर्ष में हमने कई साथियों को खो दिया और अब हमें शांति और समाज की भलाई के लिए लौटना चाहिए।”

भूपति ने अपने साथियों से कहा “अब हथियार डालकर शांतिपूर्ण समाज में काम करना ही विकल्प है।” उन्होंने बताया कि 16 सितंबर को पहली बार उन्होंने हथियार छोड़ने की बात कही थी और इसके बाद गढ़चिरौली, माध (अबूझमाड़ संभाग) और पूर्वी बस्तर में कई साथियों ने भी इसी तरह का संदेश दिया।

केंद्रीय नक्सल समिति के आरोपों का खंडन

पिछले हफ्ते केंद्रीय नक्सल समिति ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर भूपति और उनके साथियों पर सुख-सुविधाओं के लिए आंदोलन छोड़ने का आरोप लगाया था और उन्हें देशद्रोही करार दिया था। भूपति ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके फैसले के बारे में शांति से सोचें।

भूपति के आंदोलन छोड़ने के बाद छत्तीसगढ़ के बस्तर में भी सामूहिक आत्मसमर्पण हुआ, जिसमें रूपेश समेत लगभग 210 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए।

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Bhupati’s Appeal : भूपति का संदेश स्पष्ट है, समय बदल चुका है, हथियार डालकर जनता की भलाई में काम करें। जो अभी भी हिंसक रास्ते पर हैं, उन्हें मुख्यधारा में लौटना चाहिए। हम मदद के लिए तैयार हैं। यह कदम नकिसल संघर्ष में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है और क्षेत्र में शांति की दिशा में बड़ा संदेश देता है।