पूर्व गृह मंत्री देशमुख के खिलाफ जारी रहेगी CBI जांच, सुप्रीम कोर्ट ने की महाराष्ट्र सरकार की याचिका खारिज

नई दिल्ली। महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित एक मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो से लेकर अदालत की निगरानी वाली विशेष जांच दल को सौंपने की मांग संबंधी राज्य सरकार की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। न्यायाधीश एस.के. कौल और न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश की पीठ ने बम्बई हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली महाराष्ट्र सरकार की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। इससे पहले उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी थी।

महाराष्ट्र सरकार ने शीर्ष अदालत के समक्ष दलील देते हुए कहा कि सीबीआई के निदेशक सुबोध कुमार जायसवाल महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक रह चुके हैं। उनके कार्यकाल के दौरान देशमुख पर पुलिस अधिकारियों के स्थानांतरण और नियुक्ति में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। ऐसे में जायसवाल भले ही आरोपी न हो, लेकिन उनकी भूमिका एक गवाह के रूप में होने की पूरी संभावनाएं हैं।

इस मामले में सीबीआई जांच की निष्पक्षता पर संदेह है। शीर्ष अदालत पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि हम इस याचिका पर विचार नहीं करेंगे। इससे पहले राज्य सरकार की याचिका उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी थी। सरकार ने इस फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। गौरतलब है कि देशमुख पर स्थानांतरण एवं नियुक्ति को लेकर रिश्वत लेने के आरोप सामने आने के बाद हाई कोर्ट के आदेश पर 24 अप्रैल 2021 को सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की थी।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।