टीआरपी डेस्क। पश्चिम बंगाल के चुनावी दंगल में भाजपा ने वो कर दिखाया जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। 206 सीटें जीतकर भगवा लहर ने ममता बनर्जी के 15 साल के साम्राज्य को उखाड़ फेंका है। इस ऐतिहासिक हार के बाद सबसे ज्यादा चर्चा में हैं तृणमूल कांग्रेस (TMC) की फायरब्रांड नेता और सांसद सायोनी घोष (Saayoni Ghosh)। चुनाव प्रचार के दौरान जिनके काबा-मदीना वाले गाने पर बवाल मचा था, अब हार के बाद उनकी पहली प्रतिक्रिया सामने आई है।

चुनाव नतीजों में TMC की करारी शिकस्त के बाद सायोनी घोष ने X (ट्विटर) पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने हार को विनम्रता से स्वीकार तो किया, लेकिन साथ ही केंद्र सरकार और एजेंसियों पर गंभीर आरोप भी जड़ दिए। सायोनी ने लिखा कि यह लड़ाई केंद्रीय एजेंसियों के दबाव, साइलेंट रिगिंग और आर्थिक नाकेबंदी के बीच लड़ी गई थी। उन्होंने साफ कहा कि हार के बावजूद वो ममता बनर्जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेंगी। सूत्रों की मानें तो पार्टी के अंदर इस हार को लेकर भारी मातम और गुस्से का माहौल है।

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भारी पड़ा जय श्रीराम से परहेज और विवादित गाना

बंगाल की गलियों में चर्चा है कि सायोनी घोष का अति-आत्मविश्वास पार्टी ले डूबा। चुनाव के दौरान सायोनी ने खुलेआम कहा था कि उनकी रैलियों में जय श्रीराम के नारे नहीं लगेंगे क्योंकि यह एक धार्मिक नारा है। वहीं, उन्होंने दिल में काबा और आंखों में मदीना गाकर ध्रुवीकरण की कोशिश की। जमीनी हकीकत यह रही कि जिन-जिन विधानसभा क्षेत्रों में सायोनी ने यह गाना गाया और सभाएं कीं, वहां TMC उम्मीदवारों को करारी हार का सामना करना पड़ा। वोटर्स ने उनके इस स्टैंड को सिरे से नकार दिया।

15 साल का राज खत्म

बंगाल की 294 सीटों में से बीजेपी ने 206 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है। ममता बनर्जी के कई कद्दावर मंत्री अपनी सीट तक नहीं बचा पाए। बीजेपी ने न केवल शहरी इलाकों में बल्कि ममता के मजबूत गढ़ माने जाने वाले ग्रामीण इलाकों में भी सेंध लगा दी है। पहली बार बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने जा रही है, जिससे राज्य की पूरी सियासत बदल गई है।

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जादवपुर की सांसद होने के नाते सायोनी ने अपने क्षेत्र की जनता का शुक्रिया अदा किया है। उन्होंने संकेत दिया है कि आने वाले दिन TMC के लिए और भी चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। सायोनी के मुताबिक, यह अंत नहीं बल्कि एक नई और तेज लड़ाई की शुरुआत है। हालांकि, राजनीतिक पंडितों का मानना है कि मां, माटी और मानुष का नारा अब अपनी चमक खो चुका है और जनता ने बदलाव पर मुहर लगा दी है।

रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।