दिल्ली-NCR और कश्मीर में भूकंप के तेज झटके

टीआरपी। उत्तर भारत के बड़े हिस्से समेत दिल्ली-NCR और जम्मू-कश्मीर में शनिवार शाम भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर 5.9 तीव्रता वाले इस भूकंप का मुख्य केंद्र अफगानिस्तान का हिंदू कुश क्षेत्र था, जिसके कंपन से लोग दहशत में आ गए और सुरक्षा के लिए घरों से बाहर निकल पड़े।

भले ही इस भूकंप का केंद्र सैकड़ों किलोमीटर दूर अफगानिस्तान में था, लेकिन इसकी गहराई अधिक होने के कारण इसका सीधा असर उत्तर भारत की गगनचुंबी इमारतों और रिहायशी सोसायटियों में रहने वाले लाखों नागरिकों पर पड़ा है। दिल्ली-NCR और गुरुग्राम जैसी घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले लोगों के बीच कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, शनिवार शाम करीब 7:05 बजे आए इस भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान सीमा के पास कालाफगन से 81 किलोमीटर दूर स्थित था। जमीन के भीतर इसकी गहराई 192 किलोमीटर दर्ज की गई। गहराई अधिक होने के कारण ही इसके सीस्मिक वेव्स (कंपन तरंगें) बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र में फैल गईं, जिससे भारत के अलावा पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और चीन तक धरती हिल गई।

भारत में इसका मुख्य असर जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर, बारामुला, कुपवाड़ा और जम्मू में देखा गया, जहां हल्के से मध्यम दर्जे के झटके महसूस होते ही लोग तुरंत खुले मैदानों की तरफ भागे। इसके कुछ ही सेकंड बाद दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में भी लोगों ने झटके महसूस किए। ऊंची इमारतों में लगे पंखे और झूमर हिलने लगे, जिससे लोग सीढ़ियों के रास्ते नीचे सुरक्षित स्थानों पर जमा हो गए। राहत की बात यह है कि आपदा प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के शुरुआती आकलन में अभी तक कहीं से भी किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान या बड़ी संरचनात्मक क्षति की सूचना नहीं मिली है।

भूकंप का समय: शनिवार शाम ठीक 7:05 बजे।

तीव्रता व गहराई: रिक्टर पैमाने पर 5.9 तीव्रता, जमीन से 192 किमी नीचे।

केंद्र बिंदु: अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान सीमा के पास हिंदू कुश (कालाफगन से 81 किमी दूर)।

प्रभावित भारतीय क्षेत्र: जम्मू-कश्मीर, पंजाब, दिल्ली-NCR, गुरुग्राम और पश्चिमी उत्तर प्रदेश।

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी और स्थानीय प्रशासन लगातार स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। वैज्ञानिकों ने नागरिकों को शांत रहने और किसी भी संभावित आफ्टरशॉक (भूकंप के बाद के हल्के झटके) की स्थिति में लिफ्ट का प्रयोग न करने और खुले स्थानों पर रहने की सलाह दी है।

रिपोर्टर श्रवण शर्मा 28 वर्षों से पत्रकारिता जगत में कार्यरत हैं। पूर्व में लगभग 7 वर्षो तक दिल्ली के प्रतिष्ठित अखबारों में पत्रकार के रूप में कार्य किया। इसके पश्चात विगत 21 वर्षों से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कार्यरत हैं। दैनिक जागरण ग्रुप के नईदुनिया संस्थान में 17 वर्ष तक कार्य किया। वर्तमान में टीआरपी न्यूज में गत वर्ष से कार्य कर रहे हैं।
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