हाई कोर्ट का ऐतिहासिक कदम
अदालती फैसलों और FIR में 'रखैल' और 'चरित्रहीन' जैसे शब्दों पर लगी रोक, लागू हुई जेंडर सेंसिटिविटी गाइडलाइन।

High Court Guidelines: प्रदेश की अदालतों की कार्यशैली, फैसलों की भाषा और पुलिस की एफआईआर (FIR) ड्राफ्टिंग में अब ऐतिहासिक और संवेदनशील बदलाव देखने को मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के परिपालन में हाई कोर्ट ने राज्य की न्यायिक प्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए विस्तृत ‘हैंडबुक और आदेश’ जारी कर दिए हैं। यह कदम न्याय प्रक्रिया को अधिक गरिमापूर्ण, भयमुक्त और पीड़ित-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

जिला अदालतों, गृह और महिला-बाल विकास विभाग को निर्देश जारी

हाई कोर्ट ने प्रदेश के सभी जिला एवं सत्र न्यायालयों, (या राज्य) स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमी, राज्य व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मुख्य सचिव, गृह विभाग, डीजीपी (DGP) और महिला एवं बाल विकास विभाग को आदेश की प्रति भेजकर इस गाइडलाइन का तत्काल प्रभाव से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। अब बंद कमरे (In-camera) में संवेदनशील केस सुने जाएंगे और गवाहों को ‘मेहमान’ की तरह गरिमा प्रदान की जाएगी।

See also  कोरोना संकट: अर्थव्यवस्था की हालत सुधारने बाजार से कर्ज लेगी केंद्र सरकार

इलाहाबाद हाई कोर्ट टिप्पणी के बाद सुप्रीम कोर्ट का स्वतः संज्ञान

यह ऐतिहासिक बदलाव इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आपराधिक पुनरीक्षण मामले में की गई असंवेदनशील और आपत्तिजनक टिप्पणियों के बाद सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लेते हुए रिटायर्ड जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया था। कमेटी की रिपोर्ट “जजमेंट एंड जेंडर सेंसिटिविटी एंड कंपैशन इन राइटिंग जजमेंट” को आधार बनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश की अदालतों और पुलिस प्रशासन में इसे अनिवार्य रूप से लागू करने का आदेश दिया।

पुराने और आपत्तिजनक शब्दों की जगह अब इस्तेमाल होंगे ये नए संवेदनशील शब्द

अदालतों के फैसलों और पुलिस एफआईआर से रूढ़िवादी व अपमानजनक शब्दों को हटाकर उनकी जगह न्यायसंगत और सम्मानजनक शब्दों को अनिवार्य किया गया है:

पुराना/आपत्तिजनक शब्दनया/संवेदनशील शब्द
प्रॉसिक्यूट्रिक्ससर्वाइवर / विक्टिम / शिकायतकर्ता
लाचार महिला / बेबस औरतसर्वाइवर / महिला
अस्मत / शील भंग करनाशारीरिक स्वायत्तता का उल्लंघन / सेक्सुअल असॉल्ट
हवससेक्सुअल वायलेंस / साक्ष्य व कानून पर फोकस
चरित्रहीन / ईजी वर्चुअल महिलासाक्ष्य व कानून पर केंद्रित संदर्भ
कीप / रखैलपार्टनर / महिला मित्र
वेश्या / कॉलगर्लसेक्स वर्कर
किन्नर / हिजड़ाट्रांसजेंडर / इंटरसेक्स
अनपढ़ / देहाती गवाहविवेकशील / समझदार गवाह

पीड़ितों का सम्मान और गरिमा बनाए रखने की विशेष पहल

निचली अदालतों से लेकर हाई कोर्ट तक यौन अपराधों के मामलों में वर्षों से चली आ रही पुरानी और असंवेदनशील भाषा पर अब पूरी तरह विराम लग जाएगा। पहले अदालतों और थानों में पीड़िता के कपड़ों, चरित्र या व्यक्तिगत जीवन पर सवाल उठाकर उसका मानसिक उत्पीड़न किया जाता था, जिससे कई पीड़ित शिकायत दर्ज कराने से कतराते थे। साथ ही, ‘हवस’ या ‘लाचार महिला’ जैसे शब्द अपराध की गंभीरता को कम करते थे। इस नई पहल से पीड़ित-केंद्रित न्याय प्रणाली स्थापित होगी।

See also  एनरॉन-दाभोल बिजली परियोजना में भ्रष्टाचार का मामला बंद

(FAQs)

Q1. हाई कोर्ट द्वारा जारी नई गाइडलाइन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य अदालतों के फैसलों और पुलिस एफआईआर से महिलाओं के प्रति अपमानजनक व रूढ़िवादी शब्दों को हटाकर न्याय प्रणाली को संवेदनशील, गरिमापूर्ण और पीड़ित-केंद्रित बनाना है।

Q2. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में किस कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने का आदेश दिया है?

उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी की रिपोर्ट “जजमेंट एंड जेंडर सेंसिटिविटी एंड कंपैशन इन राइटिंग जजमेंट” को लागू करने का आदेश दिया है।

Q3. अब एफआईआर और फैसलों में ‘रखैल’ और ‘प्रॉसिक्यूट्रिक्स’ की जगह किन शब्दों का इस्तेमाल होगा?

उत्तर: ‘रखैल’ की जगह ‘पार्टनर / महिला मित्र’ और ‘प्रॉसिक्यूट्रिक्स’ की जगह ‘सर्वाइवर / विक्टिम / शिकायतकर्ता’ शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा।

Q4. किन-किन विभागों को इस गाइडलाइन का तत्काल पालन करने का आदेश दिया गया है?

उत्तर: सभी 24 जिला अदालतों, ज्यूडिशियल एकेडमी, मुख्य सचिव, गृह विभाग, डीजीपी, विधिक सेवा प्राधिकरण और महिला एवं बाल विकास विभाग को निर्देश जारी किए गए हैं।

See also  कोरोना ने बदले सबरीमाला मंदिर के नियम, भगवान अय्यप्पा के भक्तों को अब बोतल में मिलेगा जल

Q5. अदालतों में गवाहों और संवेदनशील मामलों के लिए क्या बदलाव किए गए हैं?

उत्तर: गवाहों को ‘अनपढ़/देहाती’ की बजाय समझदार माना जाएगा, उन्हें गरिमा दी जाएगी और संवेदनशील मामलों की सुनवाई बंद कमरे (In-camera) में करने का प्रावधान मजबूत किया गया है।

रिपोर्टर श्रवण शर्मा 28 वर्षों से पत्रकारिता जगत में कार्यरत हैं। पूर्व में लगभग 7 वर्षो तक दिल्ली के प्रतिष्ठित अखबारों में पत्रकार के रूप में कार्य किया। इसके पश्चात विगत 21 वर्षों से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कार्यरत हैं। दैनिक जागरण ग्रुप के नईदुनिया संस्थान में 17 वर्ष तक कार्य किया। वर्तमान में टीआरपी न्यूज में गत वर्ष से कार्य कर रहे हैं।
पत्रकारिता जगत में राजनीतिक खबरों से लेकर खेल, धर्म-समाज, पर्यटन, संस्कृति, पुरातत्व, समाज एवं कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल संरक्षण आयोग, महिला आयोग, सहित विविध विभागों की रिपोर्टिंग का अनुभव रहा है। पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य सामाजिक क्षेत्र में बदलाव और आम जनता की समस्याओं को सटीक रूप से उजागर करना है।