IDFC First Bank Scam 590 Crore: सरकारी खजाने की सुरक्षा को धता बताते हुए 590 करोड़ रुपये का जो महाघोटाला चंडीगढ़ के IDFC फर्स्ट बैंक में सामने आया है, उसने पूरे देश की नींद उड़ा दी है। इस घोटाले में सरकारी विभागों के पैसों को फर्जी कंपनियों के जरिए इधर-उधर करने का बड़ा खेल हुआ है। इस मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भी एंट्री हो गई है, जिससे छत्तीसगढ़ के उन गलियारों में भी हलचल है जहाँ इस तरह की संदिग्ध कंपनियों के तार जुड़े हो सकते हैं।

कैसे अंजाम दिया गया इतना बड़ा खेल?

मिली जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने इतनी सफाई से काम किया कि किसी को कानो-कान खबर नहीं हुई। दरअसल, आरोपियों ने आरएस ट्रेडर्स, कैपको फिंटेक और स्वास्तिक देश प्रोजैक्ट जैसी फर्जी कंपनियां बनाईं और सरकारी विभागों के बैंक खातों से बिना किसी वैध चेक या डेबिट मेमो के ही पैसा इन कंपनियों के खातों में ट्रांसफर कर लिया। 8 विभागों के 12 बैंक खातों को निशाना बनाया गया, जिनमें IDFC फर्स्ट बैंक के सेक्टर-32 की ब्रांच मुख्य केंद्र थी। अब तक 11 लोग सलाखों के पीछे हैं, जिनमें 6 बैंक के कर्मचारी हैं और एक सरकारी मुलाजिम भी शामिल है। जांच टीम ने छापेमारी में 6 लग्जरी गाड़ियां (फॉर्च्यूनर, इनोवा और मर्सिडीज) और 25 से ज्यादा मोबाइल-लैपटॉप बरामद किए हैं।

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ED की छापेमारी और फरार कारोबारी

विजिलेंस और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की एडीजीपी चारू बाली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कर दिया है कि अभी तो बस शुरुआत है। वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए अब ED ने मोर्चा संभाल लिया है। बुधवार को ईडी ने 19 ठिकानों पर रेड मारी, जिसमें चंडीगढ़ के बड़े रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा का नाम मुख्य रूप से सामने आया है, जो फिलहाल पुलिस की पकड़ से दूर है।

जनता और विभागों पर असर

इस घटना ने सरकारी सिस्टम में काम करने वाले बाबूओं और बैंक की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब स्थिति यह है कि सरकारी विभागों के खातों की दोबारा से छानबीन शुरू हो गई है। डर यह है कि कहीं इस घोटाले की आंच देशभर की अन्य शाखाओं तक न पहुंच जाए, जिससे सरकारी कर्मचारियों के वेतन भुगतान या विकास कार्यों के फंड पर रोक लग सकती है। विजिलेंस की टीम ने 100 से अधिक बैंक खातों को डेबिट फ्रीज करने का आदेश दे दिया है।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।