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ट्रंप की 'सख्त शर्त' से मुश्किल में भारत! रूसी तेल छोड़ा तो जेब पर पड़ेगा भारी बोझ, जानें क्या है पूरा गणित

ट्रंप की 'सख्त शर्त' से मुश्किल में भारत! रूसी तेल छोड़ा तो जेब पर पड़ेगा भारी बोझ, जानें क्या है पूरा गणित
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
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टीआरपी डेस्क। भारत और अमेरिका के बीच जिस ट्रेड डील की चर्चा वैश्विक स्तर पर हो रही है, उसकी असली कीमत शायद आम भारतीय की जेब को चुकानी पड़ सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत भारत के सामने एक कड़ा प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत भारत को रूस से तेल खरीदना बंद करना होगा और इसके बदले अमेरिका एवं वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति बढ़ानी होगी। यदि भारत ऐसा नहीं करता, तो ट्रंप ने फिर से 25 फीसदी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है।

छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में जहाँ कृषि और परिवहन (Logistics) अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी महंगाई को आसमान पर पहुंचा सकती है। अगर भारत अमेरिकी दबाव में रूसी तेल से किनारा करता है, तो मालभाड़ा बढ़ने से प्रदेश में रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी हो सकती हैं।

रूस से नाता तोड़ना क्यों है मुश्किल?


भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 85 फीसदी आयात करता है। पिछले कुछ वर्षों में रूस भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। वर्तमान में भारत के कुल आयात का करीब एक तिहाई हिस्सा रूस से आता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी बड़ी कंपनियों ने भले ही रूस से खरीद रोककर वेनेजुएला की ओर रुख किया हो, लेकिन सरकारी कंपनियों के लिए यह बदलाव तकनीकी और आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण है।

तेल की 'केमिस्ट्री' और रिफाइनरी का संकट

विशेषज्ञों का कहना है कि तेल सप्लायर बदलना सिर्फ एक कागजी फैसला नहीं है। यह भारी होता है और इसमें सल्फर अधिक होता है। भारत की अधिकांश रिफाइनरियां इसी तेल को प्रोसेस करने के लिए बनी हैं। अमेरिकी तेल काफी हल्का होता है। इसे भारतीय रिफाइनरियों में इस्तेमाल करने के लिए अन्य ग्रेड के तेलों के साथ मिलाना (Blend) पड़ेगा, जो एक खर्चीली प्रक्रिया है।

आपकी जेब पर सीधा असर (7 डॉलर प्रति बैरल की मार)

रूस वर्तमान में भारत को प्रति बैरल 11 डॉलर तक की भारी छूट (Discount) दे रहा है। इसके उलट, अमेरिकी तेल न केवल महंगा है, बल्कि अमेरिका से भारत तक तेल लाने का शिपिंग खर्च भी काफी अधिक है। वोर्टेक्सा (Vortexa) के विश्लेषकों के अनुसार, रूसी तेल छोड़ने पर भारतीय रिफाइनरियों को प्रति बैरल कम से कम 7 डॉलर अतिरिक्त खर्च करने होंगे। यह बढ़ा हुआ बोझ अंततः पेट्रोल पंपों पर आम आदमी की जेब से ही वसूला जाएगा।

Deeksha Mishra
लेखक / पत्रकार:

Deeksha Mishra

कृषि एवं ग्रामीण विकास विशेष संवाददाता

The Rural Press में कृषि संकट, किसान आंदोलन, ग्रामीण विकास एवं स्थानीय प्रशासन पर केंद्रित विशेष खोजी रिपोर्टिंग।

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