School News: कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को बांटे गए मुफ्त जूते-मोजों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं। ‘विद्या विकास योजना’ के तहत मिले जूतों के कुछ ही दिनों में खराब होने की शिकायतें सामने आई हैं। अभिभावकों ने तलवे खुलने, जूते फटने और मोजों की खराब गुणवत्ता की शिकायत की है। मामला सामने आने के बाद जांच शुरू कर दी गई है।
शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उप लोकायुक्त जस्टिस केएन फणीन्द्र ने मामले का संज्ञान लिया है। शुरुआती जांच के लिए राज्य के 15 जिलों को शामिल किया गया है। राज्य सरकार ने भी अपने स्तर पर आंतरिक जांच शुरू की है। जांच में यह देखा जाएगा कि विद्यार्थियों को दिए गए जूते-मोजे तय गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं।
कुछ ही दिनों में खराब होने लगे जूते
अभिभावकों की शिकायत है कि बच्चों को मिले कई जूते नियमित इस्तेमाल के कुछ ही दिनों बाद खराब होने लगे। कुछ जगहों पर तलवे खुलने की बात कही गई है, जबकि कहीं जूतों के फटने की शिकायत सामने आई है। माता-पिता का कहना है कि सरकारी योजना के तहत दिए गए जूतों की गुणवत्ता ऐसी है कि बच्चे उनका लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।
बच्चों को मिले गलत साइज के जूते
जूते के साइज को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। कुछ अभिभावकों के मुताबिक, बच्चों को उनकी जरूरत से बड़े या छोटे जूते मिले हैं। गलत साइज के जूतों से बच्चों को उन्हें पहनकर चलने में परेशानी होने की शिकायत है। जांच में वितरण के साथ जूतों के साइज से जुड़ी शिकायतों को भी देखा जाएगा।
पिछले साल के जूतों से भी तुलना
कुछ अभिभावकों का कहना है कि पिछले साल योजना के तहत दिए गए जूतों की गुणवत्ता बेहतर थी। इस बार मिले जूतों में शुरुआती दिनों में ही खराबी आने की शिकायतें ज्यादा सामने आई हैं। इसी वजह से योजना के तहत जूतों-मोजों की खरीद और सप्लाई की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
15 जिलों में शुरुआती जांच
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद उप लोकायुक्त जस्टिस केएन फणीन्द्र ने मामले का संज्ञान लिया है। शुरुआती जांच के लिए 15 जिलों को शामिल किया गया है। जांच में जूतों और मोजों की गुणवत्ता के अलावा उनकी खरीद, सप्लाई और विद्यार्थियों तक वितरण की प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं को देखा जाएगा। जांच का उद्देश्य शिकायतों की वास्तविकता और जिम्मेदारी तय करना है।



