वकील अपनी व्यक्तिगत क्षमता से करा सकते हैं 'आत्मसम्मान विवाह': सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। बता दे, पिछले दिनों मद्रास हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था कि, तमिलनाडु में आत्म-सम्मान विवाह गोपनीयता में और अधिवक्ताओं की मौजूदगी में नहीं किया जा सकता है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति रवींद्र भट्ट और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने कहा था कि, हिंदू विवाह अधिनियम (तमिलनाडु राज्य संशोधन अधिनियम) की धारा 7 (ए) के तहत अधिवक्ताओं के लिए सुयमरियाथाई विवाह को संपन्न करने पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि, वकील, मित्र, रिश्तेदार या सामाजिक कार्यकर्ता की व्यक्तिगत क्षमता की उपस्थिति में, ऐसी शादियां करा सकते हैं। लेकिन इसके लिए यह भी जरुरी हो कि उस समय अधिकारी कोई अदालती कार्य ना कर रहे हो।

इसके अलावा, उच्च न्यायालय के आदेश में कहा गया था कि आसपास के कुछ अजनबियों के साथ गुप्त रूप से किया गया विवाह तमिलनाडु में लागू हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 7 और 7-ए के तहत आवश्यक नहीं होगा।

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क्या सुयमरियाथाई विवाह

सुयमरियाथाई दो हिंदुओं के बीच विवाह का एक रूप है। जिसे रिश्तेदारों, दोस्तों या अन्य व्यक्तियों की उपस्थिति में संपन्न किया जा सकता है। इसमें पुजारी की मौजूदगी जरूरी नहीं होती है।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।