टीआरपी। महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने आज एक बड़ा कदम उठाते हुए धर्मांतरण विरोधी विधेयक (Anti-Conversion Bill) के मसौदे को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई इस बैठक के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी इसी तर्ज पर सख्त कानून लागू होने की उम्मीदें और अधिक प्रबल हो गई हैं।
छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में जबरन धर्मांतरण एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। महाराष्ट्र में इस कानून को मिली मंजूरी के बाद, छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार पर भी जल्द से जल्द नया और अधिक सख्त कानून लाने का राजनीतिक और सामाजिक दबाव बढ़ गया है। माना जा रहा है कि इससे राज्य की सांस्कृतिक पहचान और आदिवासी परंपराओं को संरक्षण मिलेगा।
महाराष्ट्र का कड़ा रुख और छत्तीसगढ़ का ‘विज़न’
महाराष्ट्र में प्रस्तावित नए कानून के तहत जबरदस्ती, प्रलोभन या धोखे से किए गए धर्मांतरण को गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इसमें ‘लव जिहाद’ जैसे मामलों पर नकेल कसने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
इधर छत्तीसगढ़ में, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और गृह मंत्री विजय शर्मा पहले ही सार्वजनिक मंचों से यह स्पष्ट कर चुके हैं कि राज्य में धर्मांतरण रोकने के लिए पुराने कानून को बदलकर नया और प्रभावी कानून लाया जाएगा। सरकार का मुख्य फोकस ‘चंगाई सभा’ जैसी गतिविधियों पर लगाम लगाना है। उपमुख्यमंत्री ने संकेत दिए हैं कि आगामी विधानसभा सत्र में इस विधेयक को पेश किया जा सकता है, जो अन्य राज्यों के कानूनों से भी अधिक सख्त होने की संभावना है।
- महाराष्ट्र अपडेट: कैबिनेट ने विधेयक को दी मंजूरी, अब विधानसभा में होगा पेश।
- छत्तीसगढ़ की स्थिति: सरकार ड्राफ्ट तैयार कर रही है; 1968 के पुराने कानून में बड़े बदलाव की तैयारी।
- सजा का प्रावधान: नए कानून में लंबी जेल और भारी जुर्माने का प्रस्ताव संभव।
- प्रमुख मुद्दा: आदिवासी क्षेत्रों में ‘धोखाधड़ी और प्रलोभन’ के जरिए हो रहे धर्मांतरण को रोकना।
महाराष्ट्र के इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ के गृह विभाग में हलचल तेज हो गई है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि छत्तीसगढ़ का प्रस्तावित विधेयक महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के कानूनों का अध्ययन कर बनाया जा रहा है। आने वाले हफ्तों में छत्तीसगढ़ कैबिनेट भी इस पर अपनी मुहर लगा सकती है।


