Maharashtra FDA Action: महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने निजी अस्पतालों द्वारा मेडिकल सामग्री पर की जा रही ओवरप्राइसिंग और मनमाने बिलिंग खेल के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। 11 रुपये के आईवी सेट को मरीजों को 325 रुपये में बेचे जाने के खुलासे के बाद एफडीए ने अस्पतालों की इस मनमानी को रोकने का बड़ा प्लान तैयार किया है।
आयुक्त मुंढे के अनुसार, अस्पतालों के बढ़े हुए बिलों से मरीजों के परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है, क्योंकि कई चिकित्सा सामग्रियां बेहद कम कीमत पर मिलने के बावजूद भारी-भरकम एमआरपी पर बेची जा रही हैं।
नेबुलाइजर मास्क से लेकर कैनुला तक में भारी मुनाफाखोरी
एफडीए की जांच में चिकित्सा सामग्री की लागत और बिक्री मूल्य में भारी अंतर सामने आया है। अध्ययन में पाया गया कि 40 से 50 रुपये की कीमत वाला नेबुलाइजर या ऑक्सीजन मास्क मरीजों को 650 रुपये से 715 रुपये तक में बेचा जा रहा है। इसी तरह कैथेटर और आईवी कैनुला की कीमतों में भी भारी अंतर मिला है। ओवरप्राइसिंग के इस खेल पर आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे ने कहा है कि अस्पताल के बिल का सबसे महंगा हिस्सा शायद कभी अस्पताल तक पहुंचे ही नहीं।
ड्रग प्राइस कंट्रोल के दायरे में लाने की मांग
इस अध्ययन के आधार पर एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) के समक्ष एक नीति प्रस्ताव रखा है। इसमें मांग की गई है कि अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली प्राथमिक चिकित्सा सामग्री और उपभोग वस्तुओं (कंस्यूमेबल्स) को औषधि मूल्य नियंत्रण व्यवस्था (DPCO) के तहत लाया जाए। इसका मकसद मेडिकल कंज्यूमेबल्स पर मार्जिन तय कर मरीजों को राहत देना है।
तीन महीने में 230 कंपनियों और 2075 दुकानों के लाइसेंस निलंबित
निजी अस्पतालों पर शिकंजा कसने से पहले एफडीए ने व्यापक स्तर पर कार्रवाई की है। पिछले तीन महीनों में महाराष्ट्र एफडीए ने दवा कंपनियों के 2,485 निरीक्षण किए और 230 लाइसेंस निलंबित कर दिए। इसके अलावा, राज्य भर में औषधि दुकानों और विक्रेताओं के 11,780 निरीक्षण किए गए, जिनमें से 2,075 लाइसेंस निलंबित किए गए और 394 लाइसेंस पूरी तरह रद्द कर दिए गए।
‘सिंघम’ अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं तुकाराम मुंढे
महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे अपनी सख्त कार्यशैली और ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं। 3 जून 1975 को बीड जिले के ताडसोन्ना गांव में जन्मे मुंढे ने डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय (छत्रपति संभाजीनगर) से राजनीति विज्ञान में एम.ए. की पढ़ाई की और यूजीसी परीक्षा पास की। नियमों से समझौता न करने के कारण उन्हें प्रशासनिक हलकों में ‘सिंघम’ अधिकारी माना जाता है। होटल-रेस्टोरेंट में मिलावट के बाद अब उनका ध्यान अस्पतालों की अनियंत्रित बिलिंग पर है।
5 FAQs
Q1. एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने अस्पतालों के खिलाफ क्या कार्रवाई का प्लान बनाया है?
उत्तर: एफडीए ने अस्पतालों में मेडिकल सामग्री की ओवरप्राइसिंग रोकने के लिए राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण को नीति प्रस्ताव भेजकर प्राथमिक चिकित्सा सामग्री को मूल्य नियंत्रण व्यवस्था के तहत लाने की मांग की है।
Q2. अस्पतालों में किन मेडिकल सामग्रियों पर अत्यधिक मुनाफाखोरी पाई गई?
उत्तर: जांच में 11 रुपये का आईवी सेट 325 रुपये में, और 40-50 रुपये का नेबुलाइजर/ऑक्सीजन मास्क 650 से 715 रुपये में बेचे जाने का खुलासा हुआ है। इसके अलावा कैथेटर और कैनुला के दामों में भी भारी अंतर मिला।
Q3. पिछले तीन महीनों में महाराष्ट्र एफडीए ने क्या कार्रवाई की है?
उत्तर: एफडीए ने दवा कंपनियों के 2,485 निरीक्षण कर 230 लाइसेंस निलंबित किए। इसके अलावा मेडिकल स्टोर के 11,780 निरीक्षण कर 2,075 लाइसेंस निलंबित और 394 लाइसेंस रद्द किए।
Q4. आईएएस तुकाराम मुंढे कौन हैं?
उत्तर: तुकाराम मुंढे 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी हैं, जो वर्तमान में महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त हैं और अपनी सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं।
Q5. एफडीए ने एनपीपीए से क्या मांग की है?
उत्तर: एफडीए ने अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली प्राथमिक चिकित्सा सामग्री और उपभोग वस्तुओं (कंस्यूमेबल्स) को औषधि मूल्य नियंत्रण व्यवस्था (DPCO) के दायरे में लाने की मांग की है।



