नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अहम मुलाकात हुई। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर दोनों नेताओं ने करीब 50 मिनट तक द्विपक्षीय बातचीत की। पीएम मोदी ने साफ कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेदों को विवाद में बदलने से रोकना जरूरी है और मौजूदा समझौतों का पालन होना चाहिए।
सीमा पर शांति को रिश्तों का आधार बताया
पीएम मोदी ने बातचीत के दौरान सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को भारत-चीन संबंधों के लगातार विकास के लिए जरूरी आधार बताया। उन्होंने सीमा से जुड़े मौजूदा समझौतों और सहमतियों का दोनों पक्षों द्वारा पालन किए जाने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और चीन के संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखने की जरूरत है। दोनों देशों के बीच किसी मुद्दे पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्हें विवाद में बदलने से रोकना दोनों पक्षों के हित में है।
परस्पर सम्मान और संवेदनशीलता पर जोर
दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई पिछली द्विपक्षीय वार्ता के बाद रिश्तों में हुई प्रगति का स्वागत किया। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए परस्पर सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित को मार्गदर्शक सिद्धांत बनाया जाना चाहिए।
सीमा विवाद के समाधान पर क्या बात हुई?
वार्ता में दोनों पक्षों ने सीमा विवाद के निष्पक्ष, उचित और दोनों देशों को स्वीकार्य समाधान के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसके साथ ही व्यापक द्विपक्षीय संबंधों और दोनों देशों के लोगों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखने की बात कही गई।
व्यापार और आर्थिक रिश्तों पर भी चर्चा
मोदी और शी जिनपिंग के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को लेकर भी बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने की जरूरत पर जोर दिया। चर्चा में व्यापार में मौजूद संरचनात्मक असंतुलन और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े मुद्दे भी शामिल रहे।
दोनों देशों के बीच कारोबार को बेहतर बनाने के लिए पहले से तय और सार्थक बाजार पहुंच को आसान बनाने पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा कारोबारी संबंधों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और दोनों देशों के लोगों की आवाजाही को बढ़ावा देने की जरूरत पर चर्चा हुई।
वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की सहमति
बैठक के दौरान भारत और चीन ने क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर साझा आधार को लगातार बढ़ाने की जरूरत पर सहमति जताई। दोनों पक्षों ने विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करने की बात कही।
पीएम मोदी ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए चीन के समर्थन और 2026 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता में उसके योगदान की भी सराहना की।
तीन साल में तीसरी द्विपक्षीय बैठक
मोदी और शी जिनपिंग के बीच तीन वर्षों में यह लगातार तीसरी द्विपक्षीय वार्ता है। इससे पहले दोनों नेताओं की बैठकें कजान और तियानजिन में हुई थीं। इन बैठकों के बाद भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में कई प्रयास किए गए हैं।
गलवान के बाद बदले थे भारत-चीन संबंध
वर्ष 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव काफी बढ़ गया था। इस घटना में भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे, जबकि चीन की ओर से भी सैनिकों के हताहत होने की बात सामने आई थी।
इसके बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव कम करने और द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के लिए बातचीत का दौर जारी रहा। वर्ष 2024 में कजान में हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद रिश्तों को आगे बढ़ाने की दिशा में कई कदम उठाए गए।



