ISRO GSLV-F17 Naughty Boy rocket launching EOS-05 satellite for India's Earth observation mission
ISRO's GSLV-F17, popularly known as Naughty Boy, launches the EOS-05 satellite into space.

GSLV-F17 Launch: भारत ने अंतरिक्ष से अपनी निगरानी क्षमता को एक नई ताकत दे दी है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO ने GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की ओर रवाना किया है। यह मिशन इसलिए खास है क्योंकि भारत को पहली बार जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से लगातार तस्वीरें लेने की क्षमता मिलने जा रही है। GSLV रॉकेट को उसके शुरुआती मिशनों में आई तकनीकी चुनौतियों और कुछ विफलताओं के कारण अनौपचारिक रूप से ‘नॉटी बॉय’ कहा जाता रहा है। लेकिन अब यही नॉटी बॉय भारत की आंख बनकर अंतरिक्ष में एक बेहद महत्वपूर्ण सैटेलाइट पहुंचा चुका है।

4 सितंबर 2026 को सुबह 2:55 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर के दूसरे लॉन्च पैड से GSLV-F17 ने EOS-05 को लेकर उड़ान भरी। ISRO के अनुसार मिशन ने EOS-05 को निर्धारित सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया। EOS-05 भारत का पहला ऐसा इमेजिंग सैटेलाइट है, जिसे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी की निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है।

आखिर ‘नॉटी बॉय’ नाम क्यों पड़ा?
GSLV भारत के सबसे महत्वपूर्ण लॉन्च व्हीकल में शामिल है, लेकिन इसके सफर में कई तकनीकी उतार-चढ़ाव आए हैं। खासतौर पर क्रायोजेनिक तकनीक से जुड़े शुरुआती मिशनों में चुनौतियों के कारण इस रॉकेट को अंतरिक्ष जगत में मजाकिया अंदाज में ‘नॉटी बॉय’ कहा जाने लगा। वर्ष 2021 में GSLV-F10 मिशन के दौरान EOS-03 सैटेलाइट को निर्धारित कक्षा में पहुंचाने का प्रयास सफल नहीं हो पाया था। क्रायोजेनिक स्टेज में आई समस्या के कारण मिशन अधूरा रह गया था। अब पांच साल बाद इसी क्षमता को नई ताकत के साथ हासिल करने के लिए EOS-05 मिशन को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। GSLV-F17 की सफलता ISRO के लिए सिर्फ एक लॉन्च नहीं, बल्कि पिछली चुनौतियों के बाद एक मजबूत वापसी भी है।

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36 हजार किलोमीटर ऊपर से भारत पर नजर
EOS-05 यानी GISAT-1A की सबसे बड़ी ताकत इसकी कक्षा है। यह पृथ्वी से लगभग 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई वाली जियोसिंक्रोनस कक्षा से काम करेगा। सामान्य अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट पृथ्वी के काफी करीब से गुजरते हैं और किसी खास इलाके की तस्वीर लेने के लिए उन्हें दोबारा उसी क्षेत्र के ऊपर पहुंचना पड़ता है।लेकिन EOS-05 की क्षमता अलग है। जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में रहने के कारण यह एक निश्चित क्षेत्र की लगातार निगरानी करने में सक्षम होगा। यही वजह है कि इसे भारत की अंतरिक्ष में नई ‘आंख’ के रूप में देखा जा रहा है।

दुश्मनों की गतिविधियों पर रहेगी पैनी नजर
EOS-05 का इस्तेमाल केवल मौसम या प्राकृतिक संसाधनों की जानकारी जुटाने तक सीमित नहीं है। इसकी लगातार निगरानी क्षमता रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरतों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत के सीमावर्ती और दूरदराज के क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखना हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है। जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से मिलने वाली लगातार इमेजिंग क्षमता महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों और रणनीतिक ठिकानों की निगरानी को मजबूत कर सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक भारत को अंतरिक्ष से लंबे समय तक किसी विशेष क्षेत्र पर नजर बनाए रखने की क्षमता देती है। हालांकि इसका प्रमुख उद्देश्य पृथ्वी अवलोकन है, लेकिन इससे मिलने वाली जानकारी राष्ट्रीय और रणनीतिक जरूरतों में भी उपयोगी हो सकती है।

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हर 30 मिनट में पूरे भारत की तस्वीर
EOS-05 की इमेजिंग क्षमता इसे भारत के अन्य सामान्य रिमोट सेंसिंग मिशनों से अलग बनाती है। यह सैटेलाइट पूरे भारतीय भूभाग की तस्वीर लगभग हर 30 मिनट में लेने की क्षमता रखता है। वहीं जरूरत पड़ने पर चुनिंदा और महत्वपूर्ण क्षेत्रों की इमेजिंग का अंतराल लगभग पांच मिनट तक किया जा सकता है। इसका मतलब है कि किसी बड़े इलाके में तेजी से बदलती परिस्थितियों को पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी तरीके से समझा जा सकेगा।

बाढ़ और चक्रवात में बनेगा संकटमोचक
EOS-05 का एक बड़ा इस्तेमाल आपदा प्रबंधन में होगा। भारत में हर साल बाढ़, चक्रवात, जंगल की आग और अन्य प्राकृतिक आपदाएं बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाती हैं। ऐसे समय में किसी क्षेत्र की ताजा तस्वीर और लगातार अपडेट मिलने से राहत एवं बचाव कार्यों की योजना बनाने में बड़ी मदद मिल सकती है। बाढ़ का फैलाव कितना बढ़ रहा है, चक्रवात का असर किन इलाकों तक पहुंच रहा है या जंगल की आग किस दिशा में फैल रही है—ऐसी स्थितियों की निगरानी में EOS-05 महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

किसानों के लिए भी बड़ी खबर
अंतरिक्ष में भेजा गया यह सैटेलाइट केवल सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए नहीं है। इसका फायदा कृषि क्षेत्र को भी मिल सकता है। सैटेलाइट से मिलने वाले डेटा के जरिए फसलों की स्थिति, वनस्पति की सेहत और बड़े कृषि क्षेत्रों में होने वाले बदलावों का आकलन किया जा सकेगा। EOS-05 में उन्नत इमेजिंग सिस्टम लगाया गया है, जो विजिबल, नियर-इन्फ्रारेड और शॉर्ट-वेव इन्फ्रारेड बैंड में पृथ्वी का डेटा जुटाने में सक्षम है।

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2,367 किलो का भारी पेलोड
EOS-05 का वजन करीब 2,367 किलोग्राम है। यह GSLV मिशन के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और भारी पेलोड है। GSLV-F17 तीन चरणों वाला लॉन्च व्हीकल है और इसकी ऊंचाई करीब 51.7 मीटर है। इस मिशन ने EOS-05 को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचाया, जिसके बाद सैटेलाइट अपनी अंतिम परिचालन कक्षा तक पहुंचने की प्रक्रिया पूरी करेगा।

ISRO के लिए क्यों खास है यह मिशन?
EOS-05 मिशन को ISRO की बड़ी वापसी के रूप में भी देखा जा रहा है। यह सिर्फ एक नया सैटेलाइट लॉन्च नहीं है, बल्कि 2021 में अधूरे रह गए जियोसिंक्रोनस इमेजिंग मिशन के लक्ष्य को दोबारा हासिल करने की दिशा में बड़ी सफलता है। अब भारत के पास अंतरिक्ष से किसी विशेष क्षेत्र की लगातार निगरानी करने की क्षमता मजबूत होगी। इससे आपदा प्रबंधन, कृषि योजना, पर्यावरण अध्ययन और रणनीतिक जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण डेटा उपलब्ध हो सकेगा। जिस रॉकेट को कभी उसकी तकनीकी चुनौतियों के कारण ‘नॉटी बॉय’ कहा गया, वही अब भारत की अंतरिक्ष शक्ति का नया संदेश दे रहा है। नॉटी बॉय अब सिर्फ अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाला रॉकेट नहीं, बल्कि भारत की नई अंतरिक्ष निगरानी क्षमता का प्रतीक बन गया है।

नवीन कुमार साहू को पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 5 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से Bachelor of Science (Electronic Media) और Master of Science (Electronic Media) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें छत्तीसगढ़, राष्ट्रीय समाचार, राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन का अनुभव है। वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार एवं लेख तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक और उपयोगी जानकारी सरल भाषा में पहुंचाना है।