टीआरपी डेस्क। भारत की प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) व्यवस्था में छह दशक का सबसे बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार 1 अप्रैल 2026 से करीब 64 साल पुराने ‘इनकम टैक्स एक्ट, 1961’ को समाप्त कर ‘इनकम टैक्स एक्ट, 2025’ लागू करने की तैयारी में है। इस ऐतिहासिक बदलाव के लिए सरकार ने इनकम टैक्स रूल्स 2026 का ड्राफ्ट जारी कर दिया है, जिसमें ITR-1 से लेकर ITR-7 तक के फॉर्म्स के लिए नए कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं।

छत्तीसगढ़ के लाखों मध्यम वर्गीय करदाताओं, छोटे व्यापारियों और प्रोफेशनल्स के लिए अब टैक्स फाइलिंग पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है। नए नियमों में पारदर्शिता पर इतना जोर है कि छोटी सी जानकारी छिपाना भारी पड़ सकता है। आम लोगों और सीए (CA) को अपने सुझाव देने के लिए 22 फरवरी 2026 तक का समय दिया गया है।

डिजिटल फाइलिंग अब अनिवार्य, कागजी दौर खत्म


नए ड्राफ्ट के मुताबिक, अब लगभग सभी टैक्सपेयर्स के लिए ऑनलाइन रिटर्न भरना अनिवार्य होगा। केवल 80 साल से अधिक उम्र के सुपर सीनियर सिटिजन्स को ही पेपर फाइलिंग की रियायत मिलेगी। बाकी सभी को EVC या डिजिटल सिग्नेचर का उपयोग करना ही होगा।

फॉर्मकिसके लिए है?मुख्य बदलाव/शर्तें
ITR-1 (सहज)सैलरी और बैंक ब्याज वाले रेजिडेंट्स के लिए।केवल साधारण टैक्स मामलों के लिए सीमित।
ITR-2जिनके पास बिजनेस इनकम नहीं है पर कैपिटल गेन है।विदेशी संपत्ति और एक से ज्यादा मकान वालों के लिए सख्त खुलासे।
ITR-3बिजनेस या प्रोफेशन से आय वालों के लिए।प्रिजम्पटिव टैक्स से बाहर रहने वालों के लिए अनिवार्य।
ITR-4 (सुगम)छोटे कारोबारी (प्रिजम्पटिव टैक्स)।50 लाख से ज्यादा आय या विदेशी संपत्ति होने पर यह फॉर्म नहीं भर पाएंगे।

ITR-4 भरने वालों को लगेगा झटका


सबसे ज्यादा सख्ती ITR-4 (सुगम) पर की गई है। यदि आप किसी कंपनी में डायरेक्टर हैं, आपके पास अनलिस्टेड शेयर हैं या आपकी सालाना कमाई 50 लाख रुपये से अधिक है, तो आप चाहकर भी सुगम फॉर्म का लाभ नहीं ले पाएंगे। ऐसे करदाताओं को अब विस्तृत जानकारी वाले ITR-3 फॉर्म का चुनाव करना होगा।

ट्रस्ट और संस्थानों पर भी नकेल


ITR-7 के जरिए चैरिटेबल ट्रस्ट्स, धार्मिक संस्थानों और राजनीतिक दलों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। अब उनके द्वारा प्राप्त डोनेशन (दान) और खर्च किए गए फंड की हर पाई का हिसाब सीधे ऑडिट रिपोर्ट से लिंक होगा।