सुप्रीम कोर्ट

टीआरपी डेस्क। सोशल मीडिया का उपयोग करके न्यायिक अधिकारियों को बदनाम नहीं किया जा सकता है। यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के द्वारा जिला न्यायाधीश के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के लिए एक व्यक्ति को 10 दिनों की जेल की सजा सुनाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए की।

न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की अवकाश पीठ ने कहा कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करने को इच्छुक नहीं है। उन्होंने कहा, सिर्फ इसलिए कि आपको एक अनुकूल आदेश नहीं मिला है, आप न्यायिक अधिकारी को बदनाम नहीं कर सकते।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट से नरमी बरतने की मांग की और कहा कि कारावास का आदेश अत्यधिक था। वकील ने कहा कि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा मामला है और आवेदक 27 मई से पहले ही जेल में है। शीर्ष अदालत की पीठ ने तब टिप्पणी की, हम यहां कानून पर फैसला करने के लिए हैं, दया दिखाने के लिए नहीं। खासकर ऐसे व्यक्तियों के लिए।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।